चंडीगढ़। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में सहजधारी सिखों के मताधिकार को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सिख गुरुद्वारा एक्ट में 2016 में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
सहजधारी सिख पार्टी ने 2017 में याचिका दाखिल करते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन को चुनौती दी थी। सितंबर 2019 में हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके बाद कोरोना के कहर के चलते इस याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब याचिका सुनवाई के लिए पहुंची तो हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को फिर से इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश जारी किया है।
याचिका में कहा गया कि इस संशोधन के चलते 70 लाख से अधिक सहजधारी सिख एसजीपीसी चुनाव में वोट के अधिकार से वंचित रह जाएंगे। सहजधारी सिख पार्टी ने बताया कि 1925 में सिख गुरुद्वारा एक्ट बनाया गया था। इसके बाद 1944 में सिख धर्म में एक्ट में संशोधन कर इसमें सहजधारी सिख शब्द जोड़ा गया। याची ने बताया कि राजनीतिक कारणाें से 2003 में नोटिफिकेशन जारी कर सहजधारी सिखों को एसजीपीसी के बोर्ड और कमेटी के चुनाव में मताधिकार से वंचित कर दिया गया। याची ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की 2003 की अधिसूचना को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद 2016 में केंद्र सरकार ने गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन कर एक बार फिर से सहजधारी सिखों को मताधिकार से फिर वंचित कर दिया।