-सुखना लेक पर अवैध वेंडर होने की दलील देते हुए दाखिल की गई थी याचिका
-जनहित याचिका में ऐसे वेंडरों को लेकर जानकारी न होने के चलते खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सुखना लेक पर वेंडरों के अवैध रूप से बैठने और इनके खिलाफ नगर निगम की कोई कार्रवाई न होने की दलील देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से दखल देने की अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका में वेंडरों के बारे में जानकारी न होने और याची का कोई अधिकार साबित न होने के चलते याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए संजय मिश्रा व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ नगर निगम ने विभिन्न सेक्टरों में वेंडरों को बिक्री के लिए लाइसेंस जारी किए हैं। जिस वेंडर को जहां का लाइसेंस मिला है उसे केवल वहीं बिक्री करने की अनुमति होती है। ऐसा न करने वालों के खिलाफ नगर निगम की एनफोर्समेंट टीम को कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
याची ने बताया कि उसके व उसकी तरह अन्य वेंडरों के पास सुखना लेक में बिक्री का लाइसेंस है, लेकिन कुछ लोग जिनके पास वहां का लाइसेंस नहीं है वो भी अपनी दुकान लगा रहे हैं। याची ने बताया कि नगर निगम की एनफोर्समेंट टीम होने के बावजूद इन वेंडरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि नगर निगम को निर्देश दिया जाए कि वे एनफोर्समेंट कर्मचारियों के संबंध में जवाबदेही के आधार पर एक स्पष्ट और प्रभावी मॉड्यूल तैयार करें। इस मॉड्यूल के अनुसार ही अवैध वेंडरों पर कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका के साथ ऐसे वेंडरों की जानकारी नहीं दी गई है जिनके बारे में याचिका में दलील दी गई है। इसके साथ ही याची इस मामले में अपना अधिकार साबित करने में भी नाकाम रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।