आतंकवाद के दौर में फर्जी एनकाउंटर कर उनके शवों को लावारिस बताकर उनके अंतिम संस्कार करने के आरोपी पुलिस अधिकारी ने एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। तरनतारन के मनोचहल थाने के तत्कालीन एसएचओ राज कुमार ने सीनियर एडवोकेट बिपिन घई के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए राहत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।
आतंकवाद के दौरान पंजाब पुलिस ने बड़ी संख्या में लावारिस लाशों के दाह संस्कार किए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 नवंबर 1995 मे सीबीआई को जांच करने के आदेश दिए थे। सीबीआई ने 1997 में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। 1999 में इस मामले में चालान पेश किया गया था। तब से लेकर अब तक इन मामलों में विभिन्न कारणों से ट्रायल लंबित चल रहा था। लेकिन हाई कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में इस मामले के सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए ट्रायल पर लगी रोक हटा दी थी।
हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट को आगे की कार्रवाई को पूरा करने का आदेश दिया था। इस मामले में याचिकाकर्ता भी आरोपी है। हाईकोर्ट ने याचिका पर अब सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह साफ कर दिया कि इस मामले में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह मांग पहले ही हाईकोर्ट द्वारा खारिज हो चुकी है।