चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने 27 वर्ष पुराने सुखपाल सिंह फर्जी एनकाउंटर मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के रिटायर होने के चलते अब डीजीपी इंटेलिजेंस प्रबोध कुमार को एसआईटी का मुखिया बनाया गया है।
पंजाब सरकार ने बताया कि एसआईटी ने सुखपाल सिंह को उठाने के मामले में अवतार सिंह तारी की भूमिका बताई है जबकि पहले की एसआईटी ने तारी पर सवाल नहीं उठाए थे। यह भी बताया गया कि तारी को अप्रैल 2020 में 41 दिनों की पैरोल मिली थी जिसे कोरोना के कारण सितंबर 2021 तक बढ़ा दिया गया था। पैरोल खत्म होने के बाद से वह फरार है और उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले के आरोपी निलंबित आईजी परमराज उमरानंगल ने कहा कि उन्हें एसआईटी के नए मुखिया की नियुक्ति पर आपत्ति है। अपनी इस आपत्ति को वह अगली सुनवाई पर दर्ज करवाएंगे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 18 जुलाई तक स्थगित कर दी।
क्या है मामला
निलंबित आईजी परमराज उमरानंगल पर सुखपाल सिंह नामक एक व्यक्ति के फर्जी एनकाउंटर का आरोप है। मृतक सुखपाल की पत्नी दलबीर कौर ने एडवोकेट आर कार्तिकेय के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि 1994 में रोपड़ के तत्कालीन डीएसपी परमराज उमरानंगल ने सुखपाल सिंह का फैक एनकाउंटर किया था। आतंकवादी गुरनाम सिंह बंडाला की जगह उमरानंगल ने सुखपाल का एनकाउंटर किया था। परिवार द्वारा उमरानंगल द्वारा किए फेक एनकाउंटर से जुड़ा एक हलफनामा भी हाईकोर्ट में दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में डीजीपी सिद्धार्थ चटोपाध्याय की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर जांच का आदेश दिया गया था।