उत्तराखंड के बाद अब मोरनी के खेड़ा बागड़ा गांव के पास जंगल में देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ एरिया में भयंकर आग फैल गई। आग इतनी है कि वन विभाग के कर्मचारियों के लिए इस बुझाना नामुमकिन लग रहा है। आग के कारणों का पता नहीं लग पाया है। जानकार लोगों का मानना है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने जंगलों में पूरी तरह से फायर लाइनों का निर्माण नहीं किया है। जबकि वन विभाग गर्मी के सीजन में से पहले ही इन फायर लाइनों का निर्माण किया जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि वन विभाग के कर्मचारी सड़कों के आसपास ही फायर लाइनों का निर्माण करवाते है। जहां से विभाग के उच्च अधिकारियों को दिखाया जा सके।
वर्षों से नहीं आग से लड़ने के उपकरण
बता दें कि मोरनी के जंगलों में आग लगना हर साल आम है। लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों के पास आग को रोकने के लिए पर्याप्त उपकरण और साधन नहीं है। गर्मियों में जंगलों में आग बुझाना वन कर्मचारियों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। क्योंकि वन विभाग के कर्मचारियों के पास ना तो ऐसे कपडे़ हैं जिनको पहनकर आग के पास तक जाया जा सके। न ही आग बुझाने के लिए अन्य किसी भी तरह का सामान है। आग लगने पर वन विभाग के कर्मचारी झाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं।