चंडीगढ़। आईजी गौतम चीमा को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई द्वारा दर्ज 29 अप्रैल 2020 की एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई को भी रद्द करने का आदेश दिया है।
आईजी गौतम चीमा ने सीनियर एडवोकेट बिपिन घई के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 2020 में सीबीआई ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर जांच आरंभ की थी। याची ने बताया कि शिकायत के अनुसार उन्होंने एक भगोड़े सुमेध गुलाटी को पुलिस हिरासत से जबरन अपने वाहन में बैठाया। इसके बाद वह उसे मोहाली के मैक्स अस्पताल लेकर गए जहां एक महिला ने सुमेध गुलाटी से मारपीट की और उससे केस वापस लेने की धमकी भी दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और सीबीआई ने जांच कर अंतिम रिपोर्ट भी पेश कर दी। याची ने कहा कि मैक्स अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि सुमेध गुलाटी और अन्य अपनी कार में वहां गए थे। पुलिस उसे वहां नहीं लाई थी बल्कि यहां घटना होने के बाद पुलिस गुलाटी को साथ लेकर गई थी। ऐसे में याची पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। याची को इस मामले में फंसाया जा रहा है और वह निर्दोष है। ऐसे में एफआईआर रद्द की जाए। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को मंजूर करते हुए इस मामले में दर्ज एफआईआर व कानूनी कार्रवाई को रद्द करने का आदेश दिया है।