चंडीगढ़। एक आवेदक के शस्त्र लाइसेंस के रिन्यूअल में देरी पर हरियाणा सेवा का अधिकारी आयोग ने डीसीपी पंचकूला मोहित हांडा की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही एसएचओ, एमडीसी पंचकूला, और तत्कालीन एसएचओ पर 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने बताया कि 2019 से आवेदक अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए पंचकूला पुलिस से संपर्क कर रहा था, जोकि हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत एक अधिसूचित सेवा है। इसके अंतर्गत यदि लाइसेंस की वैधता समाप्त नहीं हुई है तो 15 दिन और यदि वैधता समाप्त हो गई है तो 22 दिन की समय सीमा निर्धारित है।
आवेदक के बार-बार अनुरोध को गलत रिपोर्ट के आधार पर स्वीकार नहीं किया गया। मई, 2021 में फिर से व्यक्तिगत रूप से डीसीपी से मिलने के बाद ही उनके मामले को संबंधित एसएचओ को भेज दिया गया। इसके बावजूद, अक्टूबर 2021 में मामले को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई थी। डीसीपी पंचकूला उक्त सेवा प्रदान करने के लिए नामित अधिकारी होने के नाते उक्त समय सीमा के अनुसार अधिसूचित सेवाओं के वितरण की निगरानी करने में विफल रहे। इसलिए आयोग ने उन्हें निर्धारित समय सीमा के अनुरूप इस मामले को सुपरवाइज करने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन एसएचओ, एमडीसी सुशील कुमार और एसएचओ वहीदा हामिद ने अपनी रिपोर्ट में देरी की, जिससे आगे मामले में देरी हुई। इसके लिए आयोग ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया और उन पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जो इन अधिकारियों द्वारा आदेश की तिथि से 30 दिनों में कोष में जमा करवाया जाना है।
समय पर सेवा नहीं प्रदान नहीं करने वालों को आयोग द्वारा जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस वर्ष से देरी के किसी भी मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि नामित अधिकारी या वे अधिकारी जो देरी के लिए जिम्मेदार हैं, वे आयोग को संतुष्ट करने में विफल रहते हैं। ऐसे मामलों में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। - टीसी गुप्ता, मुख्य आयुक्त, हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग