कार्तिक अमावस्या 4 नवंबर को सुबह 6 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इसके साथ स्वाति नक्षत्र (सुबह 7 बजकर 44 मिनट से अगले दिन सुबह पांच बजकर आठ मिनट तक), आयुष्मान योगकालीन (सुबह 11 बजकर 9 मिनट) से अपराह्न, सांधाह्न, प्रदोष, निशीथ, महानिशीथ व्यापिनी अमावस्या युक्त होने से पुण्यदायक होगी। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि इस साल दीपावली पर ग्रह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन तुला राशि में एक साथ चार ग्रहों की युति है। दिवाली पर तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा विराजमान रहेंगे। ऐसा संयोग दुर्लभ ही बनता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति, बुध को ग्रहों का राजकुमार और चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। चूंकि तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं और वे भौतिक सुख-सुविधाओं के कारक हैं, ऐसे में यह दुर्लभ संयोग लोगों पर मां लक्ष्मी की भरपूर कृपा बरसेगी।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल शाम 5 बजकर 32 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। वृष (चर) लग्न 6 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल में वृष लग्न, स्वाति नक्षत्र, तुला का चंद्रमा तथा अमृत की चौघड़िया सायं 5 बजकर 32 से 7 बजकर 12 तक और चर की चौघड़िया 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक पूजन प्रारंभ कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमृत और चर की चौघड़िया के योग में दीपदान, श्रीमहालक्ष्मी पूजन, कुबेर-गणेश-बही खाता पूजन, धर्म स्थलों और घर में दीपक प्रज्वलित करना शुभ रहेगा।
निशीथ काल
रात्रि 8 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक निशीथ काल रहेगा। निशीथ काल में 8 बजकर 52 मिनट तक चर की चौघड़िया मुहूर्त शुभ रहेगा किंतु उसके बाद रोग एवं चर की चौघड़िया रात्रि 12 बजकर 11 मिनट तक पूजन आरंभ हेतु शुभ नहीं है। अत: 8 बजकर 52 से पहले पूजन प्रारंभ हो जाना चाहिए।