चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के वीसी के एक बयान के बाद शिक्षकों में आक्रोश फैल गया। पीयू के अलावा पंजाब के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों में इसे लेकर नाराजगी है। उन्होंने इस बयान की निंदा की। शिक्षकों ने कहा है कि पीयू वीसी ने सातवें वेतनमान का खुद लाभ ले लिया, लेकिन जब बात शिक्षकों को लाभ दिलाने की आई तो वह शिक्षकों को पीयू में धरना न करने की सलाह दे रहे हैं। पुटा ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों के मसलों को वह हल नहीं कर पा रहे हैं तो ऐसी बयानबाजी न करें। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये है मसला
पंजाब विश्वविद्यालय के अलावा पंजाब के 196 कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के शिक्षक सातवें वेतनमान की मांग को लेकर पीयू में भूख हड़ताल कर रहे हैं। लगभग एक माह से यह हड़ताल चल रही है। शिक्षक पंजाब सरकार से सातवें वेतनमान की मांग कर रहे हैं। हर दिन रोस्टर के मुताबिक शिक्षक यहां पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठते हैं। पुटा का आरोप है कि इसे लेकर वीसी ने एक साक्षात्कार में कहा है कि शिक्षक यहां भूख हड़ताल क्यों कर रहे हैं, उन्हें यूजीसी चले जाना चाहिए।
ये है पुटा की नाराजगी
पंजाब विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने वीसी के साक्षात्कार के बाद एक पत्र जारी किया है। कहा है कि पीयू वीसी शिक्षकों के हक के प्रति उदासीन हैं। क्योंकि उन्होंने खुद तो सातवें वेतनमान का लाभ ले लिया, लेकिन शिक्षकों को धरना देने से भी मना कर रहे हैं। पुटा ने आरोप लगाया कि यह स्वार्थ की पराकाष्ठा है। पीयू के मुखिया को शिक्षकों से कोई सरोकार नहीं जो अपनी वास्तविक मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। कहा कि वीसी ऊंचे टावर पर विराजमान हैं। ऐसे में शिक्षकों व छात्रों से उनका संपर्क टूटा हुआ है। उन्होंने किसी का दर्द जानने की कोशिश नहीं की। पुटा की गंभीरता को नहीं जाना। अपने हक के लिए धरना-प्रदर्शन करेंगे। कहा, शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुंची तो शिक्षक ईंट से ईंट बजा देंगे।
क्या कहते हैं कि शिक्षक
पीयू के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. रोनकी राम कहते हैं कि धरना-प्रदर्शन करना शिक्षकों का हक है। पीयू पब्लिक प्लेस है कोई निजी जगह नहीं। पीयू वीसी को खुद शिक्षकों की बात को आगे पहुंचाना चाहिए। वहीं, पुटा के सचिव प्रो. अमरजीत सिंह नौरा ने कहा कि वीसी के बयान से शिक्षक आक्रोश में हैं। उन्होंने सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। पीफुक्टो के महासचिव डॉ. जगवंत ने भी इस बयान की निंदा की।
पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के वीसी का निर्णय देशभर में छाया
शिक्षकों ने कुछ कुलपतियों के उदाहरण पेश किए हैं। कहा है कि पीयू के पूर्व वीसी प्रो. आरसी सोबती खुद धरना-प्रदर्शन पर आकर शिक्षकों की बात सुनते थे। वर्ष 2008 में चार माह तक धरना-प्रदर्शन चला था। उन्होंने खुद शिक्षकों की कई बातें सुनीं। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के वीसी प्रो. अरविंद ने अप्रैल में कार्यभार संभाला था। उस माह में शिक्षकों को वेतन नहीं मिला। वीसी ने एलान कर दिया था कि शिक्षकों को वेतन मिलने के बाद ही वह अपना वेतन लेंगे। वेतन बुक में भी अपना नाम सबसे पहले हटाकर सबसे आखिर में कर दिया। उनका यह निर्णय चर्चा का विषय बना। शिक्षकों का कहना है कि यह हर किसी के बस की बात नहीं। इसके लिए दिल बड़ा चाहिए।
पीयू प्रशासन ने दी सफाई
पीयू प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों का मुद्दा पंजाब सरकार व यूजीसी से जुड़ा है। शिक्षकों को वहीं पर धरना-प्रदर्शन करना चाहिए। क्योंकि वहां प्रदर्शन करने से ही उनकी बात अधिक प्रभावी ढंग से संबंधित अफसरों तक पहुंच पाएगी। यहां धरना-प्रदर्शन होने से पीयू की साख पर सवाल खड़े होते हैं। आगामी समय में नैक आदि की रैंकिंग भी होनी है।