चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से केंद्र सरकार को भेजे 742 करोड़ के अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर के प्रस्ताव पर फिर से काम शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने अटके हुए प्रस्तावों पर फिर मंथन करने के लिए कहा है। इससे संभावनाएं जागी हैं कि पीयू को यह संस्थान मिल सकता है। संभावना यह भी तलाशी जा रही है कि कैंसर सेंटर किसी अस्पताल में खोल दिया जाए और शोध संस्थान पीयू में रहे यानी दोनों संस्थानों का संचालन अलग-अलग गवर्निंग बॉडी से हो सके। जानकारों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर समय अधिक लग रहा है। इससे पीयू की साख भी जुड़ी है। इसके जरिए पीयू काफी आगे जाएगी।
इस तरह बनाया प्रस्ताव
पीयू की ओर से दो साल पहले वीसी प्रो. राजकुमार ने अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर का प्रस्ताव तैयार करवाया। प्रो. देविंदर मेहता की अगुवाई में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग, बायोइन्फॉर्मेटिक विभाग के वैज्ञानिकों ने यह प्रस्ताव तैयार किया। इसका बेस तैयार किया गया कि पंजाब के अलावा आसपास के क्षेत्रों में कैंसर लगातार पैर पसार रहा है। ऐसे में अनुसंधान व मरीजों को इलाज की अधिक आवश्यकता है। बेस तैयार करने के बाद इस रिसर्च संस्थान पर 742 करोड़ खर्च किए जाने का प्रस्ताव रखा गया और केंद्र को भेजा गया था। वहां से इस प्रस्ताव पर पहली बैठक की गई थी। सूत्रों का कहना है कि अब यह प्रस्ताव अटक गया है। इसके पुख्ता कारण अभी सामने नहीं आए हैं।
प्रोटॉन थैरेपी समेत कई विधियों से होगा काम
इस रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोटॉन थैरेपी पर काम करने की बात कही गई है। यह उपचार व रिसर्च दोनों के लिए काम आएगी। यहां कैंसर में रिसर्च करने वाले स्कॉलर कैंसर केसों के अलावा जीनोमिक परिवर्तनशीलता, महामारी के आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण, सांख्यिकीय मूल्यांकन पर काम करेंगे। साथ ही मेटास्टेसिस में शामिल आणविक तंत्र को समझने के लिए बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। इस सेंटर में जैव चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना शामिल है। कैंसर निदान के लिए विवो इमेजिंग तकनीकों और स्पेक्ट्रोमेट्रिक विधियों को व्यवहार में लाया जाएगा।
सेंटर में बनाए जाने वाले विभाग
विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान
जैव सूचना विज्ञान
कैंसर इमेजिंग
प्रवाह साइटोमेट्री कोर
जीनोमिक्स प्रोटिओमिक्स
ऊतक अधिग्रहण और सेलुलर सेल
आणविक विश्लेषण कोर
रोग की रोकथाम और प्रारंभिक निदान