चंडीगढ़। क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग मंगलवार को जारी की गई। इसमें पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) कई पायदान नीचे आ गई है। पिछले साल इसी रैंकिंग में पीयू 291-300 समूह के मध्य रही थी लेकिन इस बार स्कोर कम हुआ और पीयू 301-350 समूह के मध्य रही है। रैंकिंग जारी होने के बाद पीयू ने अंकों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप संबंधित एजेंसी पर लगाया है।
इस रैंकिंग में स्कोर रिसर्च, रिसर्च का प्रभाव, स्टूडेंट शिक्षक रेश्यो आदि मानकों पर मिलता है। पीयू आईक्यूएसी के निदेशक प्रोफेसर आशीष जैन का कहना है कि क्यूएस एजेंसी का 10 दिन पहले मेल मिला था, जिसमें उनकी रैंकिंग बेहतर दर्शाई गई थी लेकिन 10 दिन के बाद जब परिणाम सामने आए तो आंकड़े अलग दिखे। इस पर हमने कड़ी आपत्ति दायर की है।
जैन ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय का अपना एक स्थान है। इसकी अलग पहचान है। हर क्षेत्र में विश्वविद्यालय बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकारी रैंकिंग में हम बाजी मार रहे हैं लेकिन इस रैंकिंग में पिछड़ने का कारण समझ से परे हैं। गौरतलब है कि क्वैक्रेली साइमंड्स (क्यूएस) एक ब्रिटिश कंपनी है, जो दुनिया भर के उच्च शिक्षा संस्थानों के विश्लेषण में विशेषज्ञता रखती है। इसकी स्थापना 1990 में की गई थी। क्यूएस दुनिया भर के शिक्षण संस्थानों के लिए विभिन्न रैंकिंग जारी करती है, इनमें क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग और क्यूएस एशिया रैंकिंग शामिल हैं।
रैंकिंग में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और शूलिनी यूनिवर्सिटी से पिछड़ा पीयू
इस रैंकिंग में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (सीयू) और शूलिनी विश्वविद्यालय ने पीयू को पछाड़ दिया है। 12 साल पुराने शूलिनी विश्वविद्यालय ने अपनी समग्र एशिया रैंकिंग में पिछले साल के 291-300 से सुधार कर इस साल 271-280 का समूह हासिल किया है। शूलिनी विश्वविद्यालय के संस्थापक और चांसलर प्रो. पीके खोसला ने इस उपलब्धि पर फैकेल्टी और शोधकर्ताओं को बधाई दी और कहा कि यह 200 शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालयों में शामिल होने के अपने लक्ष्य की दिशा में एक और कदम है। उधर, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय को 271-280 के समूह में शामिल किया गया है। सीयू के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा कि क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग में जगह बनाने वाला सीयू एशिया का सबसे युवा विश्वविद्यालय है। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व छात्रों को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।