चंडीगढ़ में प्रदूषण की मात्रा को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति लाई जा रही है। पहला ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने इस नीति से संबंधित एक प्रेजेंटेशन भी देखी है। दो से तीन महीने में इस नीति को लाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग ई-वाहनों की तरफ रुख करें।
बेकाबू होते ईंधन के दाम के बीच लोग भी अपने बजट को संभालने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। धर्मपाल ने बताया कि निजी वाहन चालक डीजल व पेट्रोल की गाड़ियों को छोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं, इसके लिए कई इंसेंटिव स्कीम लाई जाएंगी।
ई-वाहनों के चार्जिंग की क्या व्यवस्था होगी और लोगों कितना पैसा खर्च करना पड़ेगा, इसको लेकर नीति में विस्तृत जानकारी होगी। ई-वाहनों को पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, पार्किंग फीस में भी रियायत दी जाएगी।
हाल ही में केंद्र सरकार ने परिवहन के डीकार्बोनाइजेशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने से इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर बदलाव में तेजी लाने के लिए कई पहल की हैं। फेम और पीएलआई जैसी योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण रही हैं।
विभिन्न राज्यों ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू भी कर दी है। इसके तहत दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है।
चंडीगढ़ के साथ हरियाणा सरकार भी बना रही इलेक्ट्रिक वाहन नीति
दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू कर चुकी है, जबकि चंडीगढ़ समेत हरियाणा, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और जल्द घोषणा कर सकते हैं। यूटी प्रशासक से मंजूरी के बाद चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहन नीति को पांच साल के लिए लागू किया जाएगा और उसके बाद बदली हुई शर्तों के अनुसार संशोधित किया जाएगा।