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एसीपी मामले में शर्त लगाने का संगठनों ने जताया विरोध

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चंडीगढ़। शिक्षा विभाग में एसीपी मामले में शैक्षणिक योग्यता की शर्त का पत्र जारी होने से प्रदेश के हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। इसको लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों में भारी रोष है। संगठनों ने चेताया है कि अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो वे संघर्ष करेंगे।
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हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान डॉ. दिनेश नीमबढ़िया, महासचिव चंद्रभान एवं राज्य प्रेस सचिव मोहन प्रोचा ने जुलाई 1992 से कर्मचारियों की 8 व 18 वर्ष की रेगुलर सर्विस होने पर पहली व दूसरी इंक्रीमेंट दी जाती थी। इसके बाद 1 जनवरी 1994 से प्रमोशन न दे पाने की अवस्था में स्टैंडर्ड ग्रेड दिए गए जो कि 10 से 20 वर्ष की रेगुलर सेटिस्फेक्ट्री सर्विस होने पर अगला ग्रेड दे दिया जाता था। वह दो बार ही मिलता था। एक जनवरी 2006 से स्टैंडर्ड ग्रेड का स्थान एसीपी ने ले लिया और 10/ 20/ 30 वर्षों की रेगुलर सेटिस्फेक्ट्री सर्विस पूरी होने पर तीन बार मिलना आरंभ हुआ। 4 मार्च 2014 को एसीपी 8/16/ 24 वर्षों की रेगुलर सर्विस होने पर मिलना शुरू हो गया। संघ के पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि पीजीटी प्राचार्य व क्लर्कों के लिए 3 एसीपी के लिए कोई शर्त नहीं है। एक ही संस्थान में अलग अलग नियम कैसे हो सकते हैं। उन्होंने विभाग से मांग की कि शर्तों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
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