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कृषि कानून : भाजपा ने पीएम के फैसले को सराहा, विपक्ष ने किसानों की जीत बताया

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पंचकूला। श्री गुरुनानक देवजी के प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान से जिले के किसानों में खुशी है। वह इसके लिए मोदी का आभार व्यक्त कर रहे हैं। जिले के किसान ढोल की थाप पर भंगड़ा डालकर और एक दूसरे का मुंह मीठा करवाकर बधाई दे रहे हैं। जालोली टोल प्लॉजा और चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पहुंचकर एक दूसरे को बधाई दी। उन लोगों ने इसे किसानों और लोकतंत्र की जीत बताया। वहीं, भाजपा नेता मोदी के फैसले की जमकर सराहना कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस और आप नेता सरकार के इस कदम को किसानों की जीत बता रहे हैं।
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प्रकाश पर्व पर पीएम का सराहनीय फैसला : ज्ञानचंद गुप्ता
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरुनानक देवजी महाराज के प्रकाश पर्व पर देशवासियों से क्षमा याचना कर तीनों कृषि कानून खत्म किए। आंदोलन कर रहे देश के किसानों की घर वापसी करवाई। उन्होंने कहा कि माफी मांगने से व्यक्ति का कद छोटा नहीं होता, बल्कि बढ़ जाता है। गुरु पर्व के मौके पर देश से आंदोलन रूपी तनाव को खत्म करके प्रधानमंत्री ने सभी को मेहनत और सद्भावना से काम करने का संदेश दिया है।
किसानों के सत्याग्रह की हुई जीत : प्रदीप चौधरी
कालका विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक प्रदीप चौधरी का कहना है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना किसानों के सत्याग्रह की जीत है। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर कानून बिना वक्त गंवाए बनाया जाए। उन्होंने कहा कि पहले दिन से विपक्ष कह रहा था कि तीनों कृषि कानून असंवैधानिक हैं। मोदी सरकार को ऐसे कानून बनाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं था। काले कानूनों के कारण 700 से ज्यादा किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा कि जब जनता विरोध करने के लिए सड़क पर उतरती है तो सरकार डर जाती है।
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हार को देखकर वापस लिए कानून: योगेश्वर शर्मा
आप के उत्तरी हरियाणा के सचिव योगेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा को किसानों के साथ पार्टी की जीत बताया है। लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रधानमंत्री और भाजपा को समझ में आ गया है कि जनता व खासकर किसानों से ऊपर कुछ नहीं है। प्रधानमंत्री और भाजपा की जिद ने करीब सात सौ किसानों की शहादत लेने के बाद इस बात को समझा। पार्टी ने इस आंदोलन के दौरान शहादत देने वाले किसानों के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दिए जाने की मांग की है।
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