चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने विधायकों व पूर्व विधायकों को एक से अधिक मासिक पेंशन देने के विरोध में एक विधायक- एक पेंशन की मांग की है। आप विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व में मंगलवार को विधानसभा स्पीकर राणा केपी सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने एक से अधिक पेंशन का विरोध किया और पेंशन प्रक्रिया में संशोधन किए जाने की मांग की।
स्पीकर से मुलाकात के बाद नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के खजाने पर करदाताओं का पूरा अधिकार है इसलिए किसी भी व्यक्ति विशेष को करदाताओं द्वारा देश और पंजाब के कल्याण के लिए भुगतान किए गए कर का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2004 में सुधारों के नाम पर पंजाब सरकार के कर्मचारियों की पेंशन रोक दी थी, जिसका पूरे कर्मचारी, पेंशनभोगी वर्ग ने कड़ा विरोध किया था जो आज भी जारी है।
चीमा ने सवाल किया कि कर्मचारियों की पेंशन बंद करने जैसे फैसले लेते समय, विधायकों को वेतन वृद्धि के नाम पर मिलने वाली कई मासिक पेंशन की याद क्यों नहीं आई। कांग्रेस, शिअद और भाजपा के विधायकों को इस संबंध में जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के सभी विधायक एक विधायक को एक से अधिक पेंशन देने के नियम के खिलाफ हैं। आप विधायकों ने विधानसभा स्पीकर राणा केपी सिंह से मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र में सभी विधायकों की सहमति से एक से अधिक पेंशन नियम को समाप्त किया जाए। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए कानून पारित किया जाए। इस मौके पर विधायक कुलतार सिंह संधवां, प्रो बुद्ध राम, मीत हेयर, मंजीत सिंह बिलासपुरी, कुलवंत पंडोरी, जय सिंह रोढ़ी और अमरजीत संदोआ मौजूद थे।