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किडनैपर को फायदा पहुंचाने की पुलिस की कोशिश नाकाम

Tue, 22 Jan 2013 05:31 AM IST
Panchkula
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पंचकूला। जिया के किडनैपर रविंदर सिंह गिल को अदालत ने उम्रकैद की सजा तो सुनाई साथ ही पुलिस की जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़ा कर पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अपने आर्डर में अदालत ने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर जांच रिपोर्ट में खामियां पैदा करने की कोशिश की। अदालत के आदेश के बावजूद जानबूझ कर शिनाख्त परेड के कागज जमा कराए गए, जो अदालत ने पहले ही मना कर दिया था। जिया के दादा ने उस स्टेटमेंट को भी अदालत में नहीं जमा कराया जो उन्होंने 21 अक्तूबर 2009 को जिया किडनैपर के चंगुल से छुड़ाने के बाद दी थी। एक नजर में पुलिस की ओर से किडनैपर को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। अदालत ने कहा कि पुलिस की इन खामियों से अदालत और ज्यादा सतर्क हुई और पूरे केस में बारीकी से नजर रखकर एविडेंस को खत्म नहीं होने दिया।
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पुलिस ने अदालत में यह खामियां पैदा कीं
1. अदालत ने शिनाख्त परेड कराने की पुलिस की अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन पुलिस की ओर से अदालत में जानबूझकर जमा कराए गए शिनाख्त परेड के कागज।
2. जिया के दादा ने अदालत से कहा कि वे कभी पुलिस की शिनाख्त परेड में शामिल नहीं हुए। उनसे सादे कागज में हस्ताक्षर करवाए गए थे।
3. जांच अधिकारी से जब पूछा गया कि शिनाख्त परेड के दौरान कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे, तो जांच अधिकारी पुलिसकर्मियों के नाम नहीं बता पाए।
4. 21 अक्तूबर 2009 को जिया के दादा किडनैपर के चंगुल से अपनी बच्ची को छुड़ा लाए तो उस स्टेटमेंट को अदालत में कभी भी नहीं जमा कराया गया।
जिसने रविंदर को पकड़ा उसका नाम ही नहीं
अदालत में पुलिस ने बताया कि रविंदर को नाका लगाकर 15-16 डिवाइडिंग के राउंड अबाउट पर पकड़ा, लेकिन असल में उस दौरान सेक्टर दो पुलिस चौकी इंचार्ज ऋषि पाल ने रविंदर को पीछा कर पकड़ा था। रविंदर नशे में और उसने अपनी कार से एक ऑटो चालक को टक्कर मार दी थी। उस दौरान चौकी इंचार्ज ऋषि पाल ने उसका पीछा किया। रविंदर गिल भाग कर सेक्टर चार स्थित ट्रैफिक पुलिस के थाने में चला गया। वहां पर ऋषि पाल ने उसे दबोच लिया और अपने अधिकारियों को बताया।
कोट
यदि ट्रायल से पहले आरोपी की शिनाख्त करवा दी जाए तो अदालत में उसकी शिनाख्त कोई मायने नहीं रखती। इसका सीधा फायदा आरोपियों को मिलता। पुलिस यही चाहती थी। पुलिस को मालूम था कि जिया के दादा आरोपी को अच्छी तरह से पहचानते हैं, इसलिए जानबूझकर शिनाख्त परेड के कागज जमा कराए गए।
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-अमित सिंह परमार, डिस्ट्रिक्ट अटार्नी पंचकूला
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