पंचकूला। प्राथमिक प्रशिक्षण केंद्र भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल भानू पंचकूला में महानिरीक्षक ईश्वर सिंह दुहन के मार्गदर्शन में 97वें कमांडो कोर्स में 105 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस कोर्स की अवधि 10 सप्ताह की है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को कठोर प्रशिक्षण के साथ-साथ विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है।
आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि कोर्स के दौरान कमांडो को अनेक तरह की चीजें सिखाई जाती हैं। इसमें हेली स्लेदरिंग कमांडो कोर्स का एक मुख्य हिस्सा होता है। इसमें हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे उतरने की तकनीक सिखाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य हेलीकॉप्टर से कम समय में दुर्गम जगहों पर सैनिकों को तैनात करना है। स्लेदरिंग का उपयोग आमतौर पर उन स्थितियों में किया जाता है जब खतरनाक लैंडिग स्थिति के लिए जमीन नरम या समतल न हो। इस अवसर पर सेनानी विक्रांत थपलियाल समेत अधिकारी व कमांडो कोर्स प्रशिक्षक मौजूद थे।
सभी बलों में विशेष सैनिक होते हैं कमांडो
कमांडो सभी बलों में विशेष सैनिक होते हैं। इसलिए एक कमांडो के पास स्लेदरिंग का बुनियादी कौशल होता है। हेली स्लेदरिंग की मूल आवश्यकता तब होती है जब ऑपरेशन के दौरान सैनिकों को तुरंत छोड़ने के लिए इलाकों में कोई रास्ता न हो। वहां उतरने की व्यवस्था की जाती है। इन सभी गतिविधियों के लिए इस तरह का अभ्यास करवाया जाता है।