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अग्रिम जमानत याचिका पर नोटिस

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डीसी के पूर्व पीए, सुपरिंटेंडेंट व सीनियर असिस्टेंट
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की अग्रिम जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस

17 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, सेक्टर-33बी स्थित कोठी की फाइल गुम होने का मामला

- पिछले दिनों तीनों कर्मियों पर हुआ था केस दर्ज, महिला आरोपी ने भी गिरफ्तारी पर रोक के लिए दायर की अग्रिम जमानत याचिका

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-33बी स्थित एक प्रॉपर्टी की फाइल गायब होने के मामले में डीसी के पूर्व पीए राकेश मोहन, तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट (हाउसिंग ब्रांच) नीलम गुप्ता और सीनियर असिस्टेंट हरि मोहन की अग्रिम जमानत याचिका पर जिला अदालत ने थाना पुलिस को 17 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। वीरवार को तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट नीलम गुप्ता की याचिका भी सुनवाई के लिए अदालत पहुंच गई।
तीनों आरोपियों की ओर से दायर याचिका में अपील की गई है कि वह पिछले कई वर्षों से सरकारी नौकरी पर हैं। इस दौरान उनका रिकार्ड हमेशा अच्छा रहा है और कभी उनके खिलाफ लापरवाही की कोई शिकायत भी नहीं आई है। वहीं फाइल खोने का जो आरोप है वह आधारहीन है। वहीं राकेश मोहन की ओर से दलील दी गई है कि सरकारी रिकार्ड में दर्ज है कि वह फाइल ब्रांच से संबंधित अथॉरिटी को भेजी गई थी। ऐसे में जब फाइल उसके पास ही नहीं है तो उस पर फाइल खोने का आरोप गलत है।
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याचिकाकर्ताओं के अनुसार मामले में उनकी गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है, क्योंकि उनसे कोई रिकवरी नहीं होने वाली। वहीं पुलिस को उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा अगर अदालत उन्हें अग्रिम जमानत देती है तो वह पुलिस जांच ज्वाइन कर पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
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यह है मामला
एडवाइजर के आदेश पर डीसी के पीए राकेश मोहन सहित एस्टेट ऑफिस के दो अन्य कर्मचारियों पर फाइल गायब होने के मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने 6 जुलाई को केस दर्ज किया था। पुलिस ने राकेश मोहन के अलावा तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट (हाउसिंग ब्रांच) नीलम गुप्ता और सीनियर असिस्टेंट हरि मोहन के खिलाफ आईपीसी की धारा-409 (सरकारी कर्मी द्वारा अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया था। यह केस सेक्टर-33बी स्थित एक प्रापर्टी की फाइल गायब होने के मामले में करीब 16 साल बाद आरोपितों पर मामला दर्ज किया गया है। उक्त कोठी मंजीत कौर के नाम अलॉट की गई थी। मंजीत ने इस कोठी की एवज में 10 फीसदी किस्त भी जमा करा दी थी। बाद की किस्तें जमा न होने के कारण एस्टेट ऑफिस की ओर से इस कोठी की अलॉटमेंट को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए गए थे। वर्ष 2008 में दोबारा से प्लॉट की अलॉटमेंट के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। यह मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को दोबारा कोठी के अलॉटमेंट को लेकर नीलामी प्रक्रिया पर स्टे लगा दी थी और यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए कहा। मामले से जुड़ी फाइल जब हाईकोर्ट में पेश करने की बारी आई तो इस्टेट आफिस से यह फाइल गायब की जा चुकी थी। एस्टेट ऑफिस के रिकॉर्ड में यह फाइल आखिरी बार तत्कालीन डीसी के पीए रहे राकेश मोहन के पास थी। फाइल गुम होने की सूचना के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। फाइल गुम होने की वजह से प्रशासन को हाईकोर्ट से कड़ी फटकार लगी थी। मामले की विजिलेंस जांच हुई तो उसके बाद चीफ विजिलेंस अधिकारी (एडवाइजर) के आदेश पर सेक्शन आफिसर ने तीनों कर्मियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धारा में केस दर्ज कर लिया।
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