फ्लैग - रूबरू : प्रीतम रूपल, पंजाब संगीत नाटक अकादमी के सचिव व फोक आर्टिस्ट
नोवलिस्ट थॉमस हार्डी की किताब ने बदल दी जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मैंने मशहूर नोवलिस्ट थॉमस हार्डी की एक किताब पढ़ी और इसको पढ़ने के बाद मेरी मानों जिंदगी ही बदल गई। किताब पढ़ कर ही भाषा की महत्ता का पता चला और साहित्य की ओर भी रुचि हुई। इसके बाद ही मेरी भाषाओं में पकड़ बनीं। यह बात पंजाब संगीत नाटक अकादमी के सचिव व फोक आर्टिस्ट प्रीतम रुपल ने 30 दिवसीय विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल के 20वें दिन आयोजित रूबरू कार्यक्रम में
कही।
उन्होंने बताया कि मानसा के समीप गांव नोजिया में उनका जन्म हुआ। वह बचपन से ही काफी शर्मीले स्वभाव के थे। उनकी आठवीं तक की शिक्षा गांव में ही हुई और बाकी की मानसा शहर में हुई। इसके बाद उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर रुख किया, जहां से उन्होंने मास्टर इन जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन की तालीम हासिल की और एक प्रोफेशनल जर्नलिस्ट बने। साहित्य में रुचि और अपने जबरदस्त अंदाज से उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया। उन्होंने उर्दू में महारत हासिल की। इसके अलावा फारसी में भी डिप्लोमा किया। दसवीं कक्षा के बाद उन्हें पहली बार भंगड़ा सीखने का मौका मिला, जब टीम का एक सदस्य किसी वजह से प्रैक्टिस पर नहीं पहुंच पाया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। मालवा आर्ट एवं कल्चरल सोसायटी को बतौर निर्देशक प्रीतम ने युवाओं को कड़ी मेहनत करने की सलाह दी। साथ ही सभी भाषा को समझने के लिए उसकी बुनियादी जानकारी एवं अपनी क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान होना लाजमी बताया।