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फ्लैग : 30 दिवसीय टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल का 16वां दिन

‘आषाढ़ का एक दिन’ में दिखा नारी का प्यार और त्याग

कालिदास और उनकी प्रेमिका मल्लिका पर आधारित नाटक दर्शकों के दिल में छोड़ गया गहरी छाप


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यह सही है कि एक सफल पुरुष के पीछे महिला का हाथ होता है। लेकिन कभी कभी किसी व्यक्ति को महान बनाने में नारी को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। त्याग और प्यार की यह खूबसूरत कहानी ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में दिखने को मिली। यह नाटक 30 दिवसीय टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के 16वें दिन पंजाब कला भवन में दिखाई गई। यह नाटक महाकवि कालिदास और उनकी प्रेमिका मल्लिका पर आधारित थी। इसमें दिखाया गया कि कालिदास को महान बनाने के लिए उनकी प्रेमिका मल्लिका उन्हें उज्जयिनी भेजती हैं और कालिदास वहां जाकर अपनी दुनिया में रम जाते हैं। उधर, उनकी प्रेमिका ताउम्र उनका इंतजार करती है और बाद में वह वेश्या बन जाती हैं। इसका लेखक मोहन राकेश और निर्देशन वीना धीर ने किया। दर्शकों ने इस कहानी को बहुत सराहा।
यह कहानी कालिदास और उनकी प्रेमिका मल्लिका के इर्द गिर्द घूमती है। इस कहानी को तीन भाग दिखाया गया। पहले भाग में दिखाया गया कि कालिदास हिमालय में स्थित गांव में शांतिपूर्वक जीवन गुजारते हुए अपनी कला विकसित कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें मल्लिका नामक खूबसूरत युवती से प्यार हो जाता है। इस बीच उज्जयिनी के कुछ दरबारी कालिदास से मिलते हैं और उन्हें सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के दरबार में चलने को कहते हैं। कालिदास असमंजस में पड़ जाते हैंकि एक तरफ उनका सुंदर शांति और प्रेम से भरा गांव का जीवन है और दूसरी तरफ उज्जयिनी के राजदरबार से प्रश्रय पाकर महानता छू लेने का अवसर मिल रहा है। मल्लिका चाहती है कि जिस पुरुष को वह प्यार करती है उसे जीवन में सफलता मिले और वह कालिदास को उज्जयिनी जाने की राय देती हैं। भरे मन से कालिदास उज्जयिनी चले जाते हैं।
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नाटक के दूसरे भाग में दिखाया गया कि कालिदास की उज्जयिनी में धाक जम चुकी है और चोरों ओर उनकी ख्याति फैल चुकी है। उनका विवाह उज्जयिनी में ही एक आकर्षक और कुलीन स्त्री प्रियंगुमंजरी से हो जाता है। उधर, गांव में मल्लिका दुखी और अकेली रह जाती हैं। कालिदास और प्रियंगुमंजरी अपने एक सेवकों के दल के साथ कालिदास के पुराने गांव आते हैं। कालिदास मल्लिका से मिलने नहीं जाते, लेकिन प्रियंगुमंजरी जाती हैं। वह मल्लिका से सहानुभूति जताती है और कहती है कि वह उसे अपनी सखी बना लेगी और उसका विवाह किसी राजसेवक से करवा देंगी। मल्लिका ऐसी सहायता से साफ इनकार कर देती हैं।
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नाटक के तृतीय और अंतिम भाग में कालिदास गांव में अकेले ही आ जाते हैं। मल्लिका तक खबर पहुंचती है कि कालिदास सबकुछ त्याग कर आ गए हैं। लेकिन बहुत देर हो चुकी होती है और मल्लिका तब तक एक वेश्या बन चुकी है और उसकी एक छोटी से बेटी है। कालिदास मल्लिका से मिलने आता है लेकिन मल्लिका के जीवन की सच्चाइयों को जानकर निराश होकर चले जाते हैं। कहानी में दिखाया गया कि कालिदास मल्लिका को हर मोड़ पर अकेला छोड़ देते हैं। नाटक दर्शाता है कि कालिदास के महानता पाने के प्रयास की मल्लिका और कालिदास को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। इसमें मुख्य भूमिका नवदीप बाजवा, वर्षा, नवजीत कौर, जसपाल, प्रिंस शर्मा, रूचिका, प्रिया शर्मा, गुरप्रीत सिंह, दीपक कंबोज, तमन्ना बैंस ने निभाई। इसके अलावा बैक स्टेज में पंकज, हरजिंदर सिंह, विक्रात, सौभव शर्मा, जैकी शर्मा, भूपिंदर कौर और गुरप्रीत सिंह शामिल है।
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