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मठेपुर गांव में बुखार से दो की मौत

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हथीन। उपमंडल के गांव मठेपुर में बुखार से दो की मौत हो गई। वहीं गांव में काफी मरीज बुखार के आज भी हैं। इस गांव के अलावा अन्य गांवों में भी बुखार के मरीज हैं। जिनका इलाज सरकारी व निजी अस्पतालों में चल रहा है। पलवल जिले में बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। निजी अस्पतालों में मरीजों को बिस्तर तक नहीं मिल रहे हैं।
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गांव निवासी युवा समाजसेवी दीन मोहम्मद ने बताया कि 14 वर्षीय परवेज को कई दिनों से बुखार था। स्थानीय चिकित्सकों से उसका इलाज कराया आराम नहीं हुआ। शनिवार को उसकी मौत हो गई। इसी प्रकार 17 वर्षीय अफजिला भी बुखार से पीड़ित थी। उसकी भी शनिवार को मौत हो गई। गांव मठेपुर में इससे पूर्व भी बुखार से दो मौतें हो चुकी हैं। आज भी निजी अस्पतालों में ज्यादातर मरीजों का डेंगू का इलाज किया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग अभी भी डेंगू के मरीज होने से इंकार कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पलवल जिले में मात्र डेंगू के 45 मरीज हैं। जबकि निजी अस्पतालों की संख्या देखी जाए तो डेंगू के सैकड़ों मरीज हैं। इस बारे में प्रवर चिकित्सा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि संबंधित गांव मठेपुर में हुई मौतों की रिपोर्ट ली जा रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित गांव में ओपीडी सेवाएं भी शुरू की गई थीं। डोर टू डोर स्क्रीनिंग भी की गई है।
सौंदहद, हसनपुर, कुसलीपुर में भी कई मरीज
होडल के गांव सौंदहद, हसनपुर के कई गांवों के अलावा पलवल में भी शहरी क्षेत्रों के अलावा गांवों में भी बुखार के मरीज हैं। कुसलीपुर निवासी प्रवीण ने बताया कि उनकी पुत्री को कई दिनों से बुखार है तथा उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके अनुसार गांव कुसलीपुर में बुखार से 100 से अधिक मरीज हैं। इसके अलावा रामनगर में भी बुखार के काफी मरीज हैं।
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बुखार के मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें डोर-डोर जाकर स्क्रीनिंग कर रही हैं। जहां बुखार के मरीज हैं, वहां तथा आसपास के घरों में भी लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
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-डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, जिला सिविल सर्जन
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