गांव रूपडाका में बुखार के मरीजों का इलाज करते हुए
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हथीन। जिले में बुखार का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। सरकारी और निजी अस्पताल बुखार के मरीजों से भरे पड़े हैं। कहीं भी मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल रहे हैं। इस कारण बुखार से ग्रस्त मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। हथीन में रविवार को एक और शनिवार को तीन मौतें विभिन्न गांवों में हुई हैं। इस तरह दो दिन में चार मौतें हो चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, गांव छांयसा में चार माह की बच्ची शकुनिशा पुत्री मुश्ताक की रविवार को बुखार से मौत हो गई। इसी गांव में शनिवार शाम को आठ माह के नोनी पुत्र वसीम की भी बुखार से मौत हो गई थी। परिजनों ने बताया कि बच्चे को बुखार होने पर स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद दिल्ली के कलावती अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई। जराली गांव में 13 वर्षीय आकिल पुत्र मुश्ताक की बुखार से मौत हो गई। वहीं, खिल्लुका गांव में अर्सलान (6) पुत्र आसिफ की भी बुखार से मौत हो गई।
हथीन के प्रवर चिकित्सा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि सभी मौतों की ट्रीटमेंट रिकॉर्ड लिया जा रहा है। इसके बाद ही मौतों के कारणों का वास्तविक कारणों का पता लग पाएगा। सरकारी ओपीडी सेवाएं सूनी पड़ी रहीं। रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने कई गांवों में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए, लेकिन बहुत कम ही लोग पहुंचे। छांयसा के स्वास्थ्य शिविर में छह में से 2 लोगों में बुखार की पुष्टि हुई। वहीं, गांव रूपडाका में आठ लोग स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे, जिनमें से चार बुखार के मरीज मिले। चिल्ली में केवल एक लोग भी जांच के लिए पहुंचे। प्रवर चिकित्सा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि अभी भी हथीन उपमंडल के एक दर्जन गांवों में घर-घर थर्मल स्क्रीनिंग का कार्य जारी है।