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भटक चुके बच्चों को सही राह दिखा रहे समाजसेवी

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पलवल। जिले में काफी ऐसे बच्चे हैं, जिनके ऊपर मां-बाप का सहारा नहीं है। ऐसे बच्चों को बाल अपराधी बनने से रोकना प्रशासन व समाज की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। वहीं काफी बच्चे ऐसे हैं, जो गलत संगत में पढ़कर अपराधी बन रहे हैं। ऐसे बच्चों को सही दिशा दिखाना भी एक कठिन कार्य है। जिले में कुछ लोग ऐसे हैं, जो अनाथ बच्चों का सहारा तो बन ही रहे हैं, वहीं बाल संरक्षण व बाल मजदूरों को सही राह दिखाकर व उनके मां-बाप को भी शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
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अनाथ बच्चियों का सहारा बनीं रानी लाल
71 वर्षीया रानी लाल पिछले कई सालों से वे जहां अनाथ बच्चियों का सहारा बनकर उन्हें अच्छे संस्कार व शिक्षा देने में जुटी हैं। वहीं सड़कों पर कबाड़ बीनने वाले तथा नशे की गिरफ्त में आ रहे बच्चों को भी सही रास्ते पर लाने का प्रयास कर रही हैं। रानी लाल शहर के जाने-माने वकील एसपीलाल की धर्मपत्नी हैं। उनका कहना है कि यदि उनके प्रयासों से एक भी बच्चा सही रास्ते पर चलकर समाज का हिस्सा बन गया तो उनकी मेहनत कामयाब हो जाएगी।
बाल अपराधियों को सही रास्ते पर लाना है निशांत का मकसद
बाल कल्याण परिषद के पूर्व सदस्य निशांत गौड़ का मकसद गलत संगत में रहकर अपराध की ओर जा रहे बच्चों को सही रास्ता दिखाना है। वे ऐसे कई बच्चों को सही मार्गदर्शन देकर शिक्षा की तरफ मोड़ चुके हैं। वहीं घर में कमाई के साधन न होने के चलते मजदूरी करने में लगे ेकई बच्चों का काम छुड़वाकर उन्हें स्कूल में दाखिला दिला चुके हैं। आज भी वे इसी कार्य में लगे हैं। उनका मकसद जिले में बाल मजदूरी खत्म कराना और नशे व अपराध करने से बच्चों को बचाना है।
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बच्चों को सामाजिकता की राह दिखा रहे विक्रम
जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य रह चुके विक्रम सिंह यात्री पिछले 30 वर्षों से गरीब व जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण करने में जुटे हैं। वे बच्चों को जहां शिक्षित बनाने में जुटे हैं, वहीं गलत संगत में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे बच्चों को सही राह दिखाकर पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य रहते हुए उन्हें सरकार की तरफ से जो भी मानदेय मिलता था, उसे भी वे ऐसे बच्चों की पढ़ाई व उनके पालन-पोषण पर खर्च कर देते थे। आज भी वे अपनी मेहनत से कमाई ऐसे बच्चों पर ही खर्च कर रहे हैं। लोग उन्हें अब बाबा साहब के नाम से पुकारने लगे हैं।
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