वन विभाग विलुप्त होते औषधीय पौधों को बचाने में लगा है। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने पलवल की नर्सरी में विलुप्त हो रही आयुर्वेदिक औषधि पसैन्दु की प्रजाति को खत्म होने से रोकने के लिए इसके पौधे तैयार किए हैं। नर्सरी में इनकी 550 पौध तैयार की जा चुकी हैं, जिन्हें शीघ्र ही विभिन्न स्थानों पर भिजवाकर रोपा जाएगा।
जैसे-जैसे हम आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे ही हम प्रकृति की कुछ चीजों को मिटा रहे हैं, जोकि हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। पलवल की नर्सरी में पसैन्दु नामक एक ऐसे पौधे की पौध तैयार की जा रही है, जिसको कुछ समय पहले मिटा चुके हैं और जिसका नाम तक शायद लोगों ने नहीं सुना होगा।
इस पौधे के बारे में जिला वन अधिकारी किरण सिंह रावत ने बताया कि पसैन्दु लुप्त होती हुई प्रजाति है। कुछ समय पहले तो ये पौधे तालाबों, नहरों, जंगलों में देखने को मिल भी जाते थे, लेकिन आज के समय में इनका मिलना लगभग असंभव सा हो गया है। इस पौधे को लुप्त होने से बचाने के लिए ही नर्सरी ने इस पौधे का बीज तैयार करके इसकी पौध तैयार की है, ताकि इस तरह के औषधीय पौधे लुप्त न हो सकें।
वन विभाग का कहना है कि पसैन्दु नामक इस पौधे की पौध केवल पलवल नर्सरी ने ही तैयार की है, किसी ओर जिले की नर्सरी में यह पौध नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि हमारी नर्सरी में इसका एक बड़ा पौधा था, जिससे बीज तैयार करके इसकी पौध बनाई गई है। इस पौधे को 8 से 10 फुट तक बढ़ने में 5 से 6 साल लग जाते हैं।