पलवल। किसान आंदोलन को एक साल पूरा होने पर शुक्रवार को केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में किसान विजय दिवस मनाया गया। एक साल के सफल आंदोलन के लिए किसानों ने इसके जीत की जश्न के रूप में मनाया गया। चौपाई और भजनों के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किए गए। धरने पर भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर महिला व पुरुष किसान पहुंचे। महिला नृत्य करती हुईं पहुंची। इनके अलावा भारी संख्या में कर्मचारी जुलूस निकालकर पहुंचे। धरने में पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल व पूर्व विधायक उदयभान के अलावा जनसंगठनों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं, वकीलों, व्यापारियों और बुद्धिजीवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। धरने पर सुबह यज्ञ भी किया गया।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहे धरने की अध्यक्षता 52 पाल के पंच अरुण जेलदार ने किया, जबकि संचालन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह ने किया। धरने में बोलते हुए पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने कहा कि अन्नदाताओं ने अपनी तपस्या से ऐतिहासिक आंदोलन को शिखर तक पहुंचाया है, जो वास्तव में लोकतंत्र की जीत है। यह जीत किसी के अहंकार व घमंड की जीत नहीं है, बल्कि लाखों उपेक्षित भारतीयों के जीवन और आजीविका की बात है। किसान को सड़कों पर बैठने का कोई शौक नहीं है, वह भी जल्द से जल्द अपने घर लौट जाना चाहता है। पूर्व विधायक उदयभान ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में किसानों की बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा न होने से किसानों को निराशा हुई है। किसानों ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त होने की उम्मीद के साथ अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी की पूरी होने की उम्मीद भी की थी। धरने को सोहनपाल चौहान, राजेंद्र बैंसला, डॉ.रघुवीर सिंह, रूपराम तेवतिया, जगन डागर सहित अन्य ने संबोधि किया।
धरने में छह प्रस्ताव पास किए गए
धरने को किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, राजकुमार ओहलियान ने बताया कि धरने में छह प्रस्ताव पास किए गए। जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का प्रस्ताव बनाया जाए, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, बिजली बिल 2021 वापस लिया जाए, पर्यावरण प्रदूषण कानून से पराली को हटाया जाए, 683 किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए तथा प्रत्येक किसान को एक करोड़ मुआवजा व एक सरकारी नौकरी दी जाए। केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा को तुरंत गिरफ्तार किया जाए तथा मंत्रिमंडल से हटाया जाए।
भारी संख्या में जुलूस निकालकर पहुंचे कर्मचारी
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को दिल्ली चलो किसान आंदोलन को एक साल पूरा होने व तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा से उत्साहित किसानों ने विजय दिवस मनाया गया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व मजदूर संगठन सीआईटीयू के बैनर तले शुक्रवार को विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, आशा, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्करों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारी गुर्जर धर्मशाला में एकत्रित हुए और वहां से अटोहा मोड़ तक जुलूस निकाला और किसानों के धरने में शामिल होकर एकजुटता प्रकट की। आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट इंपलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा भी विशेष तौर पर कर्मचारियों एवं किसानों के बीच पहुंचे। जुलूस का नेतृत्व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान राजेश शर्मा, सचिव योगेश शर्मा, खंड प्रधान राजकुमार डागर, एएचपीसी वर्कर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी, डिप्टी जरनल सेकेट्री जितेंद्र तेवतिया, सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी, सचिव भागीरथ बेनीवाल, उर्मिला रावत, किसान सभा से वरिष्ठ नेता सोहनलाल चौहान, जिला सचिव रूपराम तेवतिया, तारा चंद, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान बीधू सिंह ने किया।
चौपाई और भजनों के माध्यम से किया गया कटाक्ष
किसान आंदोलन को एक साल पूरा होने पर चौपाई और भजनों के माध्यम से सरकार के नीतियों पर कटाक्ष किए गए। गांव मर्रोली से नानक सरपंच व जोगिंद्र सिंह पार्टी ने नगाड़ों पर चौपाई प्रस्तुत किए। पार्टी ने किसानों को भरपूर मनोरंजन करते हुए बीते एक साल में किसानों के संघर्ष की व्याख्या की। उन्होंने भारत बंद से लेकर सड़क व रेल मार्ग जाम करने का अपनी चौपाई के माध्यम से बखान किया।
नाचती-गातीं पहुंचीं महिला किसान
शुक्रवार को भारी संख्या महिला किसान भी धरना स्थल पर पहुंची। महिलाएं नाचती व गातीं हुई धरने में शामिल हुईं। इस अवसर पर विशेष रूप से पहुंची सीमा रावत की पार्टी ने ब्रज के भजनों के माध्यम से पूरा माहौल भक्तिमय कर दिया। इनके अलावा चौहान पाल के गांव मीतरौल, गोपालगढ़ व अटोहां की महिला टोलियों ने धरना स्थल पर भजन प्रस्तुत किए।
किसानों को करनी चाहिए घर वापसी: कृष्णपाल गुर्जर
शुक्रवार को निगरानी समिति की बैठक में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि किसानों को अब घर वापस लौट जाना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून वापसी संबंधी उनकी मांग स्वीकार कर ली है। यह इतना पवित्र फैसला था जिससे किसानों की आमदनी बढ़ती। खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रकाश जैसे पवित्र फैसले को किसानों को समझा नहीं पाये, कुछ किसान समझ नहीं पाये इस कारण इसे वापस ले रहे हैं। किसानों की यही मांग थी कि तीन कृषि कानून वापस लिए जाएं। संशोधन किसानों को स्वीकार नहीं था। इसलिए उनकी मांग मान ली गई है। अब आने वाले सत्र में इस कानून को निरस्त कर दिया जाएगा।