पलवल। कृषि कानून वापसी की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। धरने का संचालन रमेशचंद गौड़ौता ने किया। अध्यक्षता राजेन्द्र बैंसला ने की। धरने पर बैठे किसानों ने केन्द्र सरकार द्वारा रबी फसल के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई मामूली वृद्धि को खोखला बताया। किसानों ने गेंहू के मूल्य में 40 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए कहा कि पिछले एक साल में अकेले डीजल में 30-35 रुपए लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। किसानों ने फैसला किया कि करनाल लाठीचार्ज के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सरकार की हठधर्मिता को लेकर 11 सितंबर को होने वाली बैठक में पलवल मोर्चे से भी किसान शामिल होंगे।
किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता व राष्ट्रीय एकता मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व रतन सिंह सौरौत ने बताया कि आज देश की शासन व्यवस्था के खिलाफ सबसे सुसंगत विपक्ष की भूमिका निभा रहा किसान आंदोलन लोकतन्त्र की धुरी बन गया है। सरकार की बुनियादी नीतिगत दिशा से टकराकर सीधे उद्योग जगत के खिलाफ जाकर आंदोलन करना ही संयुक्त किसान मोर्चा का उद्देश्य है। यह आंदोलन जनता के जीवन व लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। किसान संघर्ष सबसे अंधेरे समय में पूरी दुनिया के लिए रोशनी की किरण पैदा कर रहा है।
धरने में किसान नेता आनन्द नंबरदार, श्रीचंद, रणजीत सरपंच, होशियार सरपंच, शिवहरि शर्मा, ठाकुर लाल, शिव सिंह थानेदार, हरि नंबरदार, जिया सूबेदार, जवाहर मित्रौल, बिधू सिंह, दरियाब सिंह ब्रजलाल महाशय, किशन सिंह जाब, गोपी थानेदार व डिगंबर हथाना ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
फोटो 10पीएएलपी-17 में है।
कैप्शन: पलवल में धरने पर बैठे किसान