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Palwal News: सरकार की महाग्राम योजना बनी लोगों के लिए नर्क

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संवाद न्यूज एजेंसी
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होडल। क्षेत्र के करीब छह गांवों में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महाग्राम योजना विकास के नाम पर गांव के भोले भाले लोगों के लिए नर्क बनकर रह गई है। योजना के तहत गांवों में 44 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल और सीवरेज की लाइन डालने के अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनना था। योजना के कार्य को पूरा होने की अवधि को खत्म हुए दो वर्ष हो गए लेकिन अभी तक योजना का 40 प्रतिशत कार्य ही हुआ है। इतना ही नहीं गांवों में लाइन डालने के लिए खोदे गए रास्तों को भी बिना मरम्मत के छोड़ दिया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को आवागमन में मुश्किलें हो रही है। सरकार की योजना को जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर पलीता लगा दिया।

दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव के लोगों को शहरी तर्ज पर रहन-सहन अपनाने को लेकर महाग्राम योजना लागू की थी। इसमें उपमंडल के दस हजार की अधिक आबादी के गांवों में खाम्बी, सौन्दहद, औरंगाबाद ,भिडूकी व दीघोट को शामिल किया गया था जबकि गांव बंचारी को दूसरे चरण में शामिल करना था। महाग्राम योजना को लागू करने के लिए प्रदेश सरकार ने ठेकेदारों को ई-ट्रेडिंग के माध्यम से ठेका दिया लेकिन विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों से मिली भगत कर योजना को ठप करने के लिए घटिया सामग्री का प्रयोग कर टेंडर के हिसाब से रास्तों को ठीक करने की बजाय गड्ढों में तब्दील कर छोड़ दिया। योजनाओं में शामिल गांव के सरपंचों ने इस मामले की शिकायत जिला उपायुक्त से लेकर जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक तक की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और गांव नरक बनकर रह गए।
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क्या कहते है ग्रामीण

ग्रामीण राजेंद्र, सुनील, महेंद्र, राजन, लाल सिंह का कहना है कि जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने योजना को पूरी तरह से ठप करने पर काम किया महाग्राम योजना के तहत सिविल लाइन के नीचे कंक्रीट डाली जानी थी लेकिन किसी भी गांव में कंक्रीट नहीं लगाई गई। वहीं गांव के रास्ते पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गए। इन रास्तों से ग्रामीणों का निकलना भी दूभर हो गया है। बारिश के मौसम में सड़कें कीचड़ और पानी से लबालब रहती हैं। गांव में प्रदेश सरकार की उदासीन रवैया के चलते ग्रामीण घुट-घुटकर जीवन जीने पर मजबूर हैं। उनके पास कीचड़ से गुजरने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इसको लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा जन संवाद कार्यक्रम में शिकायत दी लेकिन सभी शिकायतें फाइलों में दबकर रह गईं। गांव के रास्तों से लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है।
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महाग्राम योजना में विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर घोटाला किया। इस घोटाले की जांच की मांग जिला ग्रीवेंस कमेटी के सामने रखी गई लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं हो पाया। अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। ललित, सरपंच, गांव दीघौट
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जिन-जिन गांवों में योजना के तहत कार्य पूर्ण हुआ है, वहां दौरा किया जा रहा है और ठेकेदार व अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। महाग्राम योजना के तहत सभी कार्य जल्द पूरे करवाए जाएंगे।- अमित कुमार कार्यकारी अभियंता जन स्वास्थ्य विभाग
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