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किसान की नुकसान का आंकलन कर मुआवजा दे सरकार

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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर करीब एक साल से जारी धरना बुधवार को भी जारी रहा। धरने में धान की सरकारी खरीद न होने पर किसानों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। किसानों ने निजीकृत तथा नियंत्रणमुक्त व्यवस्था के कारण उर्वरकों की जमाखोरी तथा कालाबाजारी होने का आरोप लगाया। साथ ही कई-कई दिनों तक लाइनों में खड़े होने के बावजूद खाद न मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। नंदराम सरपंच पहरा की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन राजेंद्र घरौट ने किया। किसान संघर्ष समिति पलवल ने प्रशासन और सरकार से एक बार फिर मांग की कि बारिश से किसानों को हुए नुकसान का पूरा आकलन करके उन्हें मुआवजा दिया जाए।
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धरने में बोलते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद व रमेश गोड़ौता ने कहा कि देश में खाद्य एवं कृषि प्रणालियों में जिस तरह से कॉरपोरेट का हस्तक्षेप बढ़ रहा है, वह किसान व मजदूर वर्ग के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। खेती व किसानी को कॉरपोरेट द्वारा अधिग्रहण करने की इजाजत से कालाबाजारी तो बढ़ेगी ही, गरीब जनता के लिए खाद्यान का भारी संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में महंगाई के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। उज्ज्वला गैस योजना गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। पेट्रोल डीजल को तो सरकार ने जैसे अपने खजाने भरने का एकमात्र जरिया बना लिया है। कॉरपोरेट घरानों को देश की धन संपदा को लूटने की खुली छूट दी जा रही है। राष्ट्रवाद की बात करने वाली भाजपा सरकार द्वारा देश की ऐतिहासिक धरोहरों को लीज पर दिया जा रहा है। कोयला खदानों के निजीकरण का असर पिछले दिनों आए बिजली संकट में हम देख चुके हैं। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, राजेंद्र बैंसला, बिधू सिंह, महावीर मलिक, रूपचंद दलाल, शिवसिंह दरोगा, चेतराम चौहान व श्रीचंद महाशय को संबोधित किया।
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