अटोहां चौक पर धरना देते किसान।
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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर करीब एक साल से नए कृषि कानूनों की वापसी की मांग के संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चल रहा धरना जारी रहा। रविवार को धरने में किसानों ने नारनौद हिसार में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर दर्ज मुकदमे रद्द करने तथा भाजपा सांसद के निजी सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। किसानों ने कहा कि सांसद के सुरक्षा कर्मियों के कारण एक निर्दोष किसान गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में जिंदगी मौत से जूझ रहा है। किसानों ने रोहतक के सांसद द्वारा किसानों की आंख निकालने तथा हाथ तोड़ने के तालिबानी फरमान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार को उसके खिलाफ संज्ञान लेने के लिए कहा। धरने की अध्यक्षता नानकचंद सरंपच मर्रोली ने की, जबकि संचालन दरियाब सिंह ने किया।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद और उदय सिंह सरपंच ने कहा कि भाजपा ने मंदिर व शिक्षण संस्थानों की पुताई कराकर उनका राजनीतिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह देश की एकता व अखंडता के लिए बहुत ही खतरनाक है। शहीद भगत सिंह ने भी कहा था कि धर्म और राजनीति अलग-अलग विषय हैं, जिनका मिश्रण होने से खतरनाक जहर पैदा होता है। इसके असर से देशरूपी शरीर के अलग-अलग अंग निष्क्रिय हो जाते हैं। किसान आंदोलन ने भाजपा की धर्म व जाति की दीवार को तोड़ दिया है, जिससे सरकार की बौखलाहट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। सरकार पर सवाल खड़ा करने वाले लोगों पर बड़ी आसानी से राष्ट्रविरोधी तमगा लगा दिया जाता है। भाजपा द्वारा लोकतंत्र को कुचलकर निरंकुश शासन चलाने का प्रयास किया जा रहा है। रोजाना बढ़ रही महंगाई ने किसान, मजदूर व कमा के खाने वाले लोगों की कमर तोड़ दी है। भाजपा सरकार खुद को देश से ऊपर समझ रही है इसलिए सरकार किसान हितों की अनदेखी कर रही है। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, रमेशचंद सौरौत, राजेंद्र बैंसला, किशनचंद शर्मा, भागीरथ बैनीवाल, रूपचंद दलाल, चेतराम मैंबर, रूपराम तेवतिया, जोगेंद्र सौरौत, बीरसिंह दलाल, हुकम सिंह, अच्छेलाल, पोहप सिंह, गोपी हवलदार, श्रीचंद महाशय व ब्रिजलाल चौहान ने संबोधित किया।