फोटो 9, 10 में है। कैप्शन: 9-पलवल चीनी मिल पर ताला लगाते किसान कैप्शन: 10-पलवल चीनी मिल पर ताला लगाने पहुंचे किसानों को समझाते हुुए
गन्ने के दाम नहीं बढ़ाने पर चीनी मिल पर किसानों ने जड़ा ताला
-मिल पर धरना देकर बैठे किसानों ने की सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, बोले 450 रुपये क्विंटल का दाम न मिलने तक बंद रहेगी मिल
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हरियाणा में गन्ने का रेट बढ़ाने की मांग के चलते पिछले कई दिनों से बंद पड़ी 13 चीनी मिलों के बाद अब मंगलवार को किसानों ने पलवल चीनी मिल पर भी ताला लगा दिया। मिल पर ताला लगाने के बाद किसान धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने किया। जबकि संचालन जिला अध्यक्ष समुन्द्र सिंह चौहान ने किया। किसानों की मांग थी कि गन्ने का रेट 450 रुपये क्विंटल दिया जाए।
प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित करते हुए रतन सिंह सौरोत ने कहा कि लंबे समय से किसान गन्ने का रेट 450 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग कर रहे हैं, मगर सरकार व प्रशासन उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इस महंगाई के दौर में खेती से किसान की लागत भी नहीं निकल पा रही है सरकार की उदासीनता के कारण गन्ना उत्पादक किसान भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। किसानों को 362 रु प्रति क्विंटल की दर से गन्ने का भाव दिया जा रहा है, जोकि किसानों के साथ अन्याय है। प्रशासन लगातार आश्वासन दे रहा है, मगर गन्ने का रेट बढ़ाने की घोषणा नहीं की जा रही है। दो महीने से भी अधिक समय से प्रदेश में चीनी मिलें चल रही हैं और किसान इस साल बिना भाव तय हुए ही पहले दिन से ही अपना गन्ना मिलों को देता रहा। यह किसान ही है, जो बिना भाव तय हुए अपने उत्पाद को राष्ट्रहित में चीनी मिलों तक पहुंचाता रहा है। गन्ने का रेट न बढ़ाने के विरोध में किसान यूनियन ने चीनी मिल मिल पर ताला लगाने का फैसला लिया था। इसी कड़ी में उन्होंने मंगलवार को मिल पर ताला लगा दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक गन्ने का रेट 450 रुपये प्रति क्विंटल नहीं किया जाएगा, तब तक मिल को चलने नहीं दिया जाएगा।
आप नेता राजीव लांबा ने कहा कि इस साल मुद्रास्फीति की दर में 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि किसान को पिछले साल के मुकाबले गन्ना बेचने पर 7 प्रतिशत का सीधा नुकसान होगा। पिछले साल का रेट 362 रुपये प्रति क्विंटल रुपये था, जिसमें महंगाई को देखते हुए निश्चित तौर पर बढ़ोतरी की जानी चाहिए। मगर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सरकार किसान हित में गन्ने के दामों में बढ़ोतरी करे। इस अवसर पर मिल के निदेशक बाबू, कल्लू गहलब, कैलाश मीतरोल, हरजीत औरंगाबाद, होशियार, प्रेमराज, वीरेंद्र, मुकेश व गजेंद्र मुख्य रूप से मौजूद रहे।