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यूक्रेन में बमबारी व रोमानिया में शुरू हुई बर्फबारी

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पलवल। एक तरफ बमबारी और दूसरी तरफ अचानक बर्फ पड़ने के बाद रोमानिया में फंसे पलवल जिले के छात्रों के लिए चिंता बढ़ने लगी है। बृहस्पतिवार को रोमानिया में फंसे छात्र कृष्ण ने बताया कि सरकार द्वारा बच्चों को निकालने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अचानक बर्फ पड़ने से फ्लाइटों की संख्या कम हो गई है। इस कारण जैसे-जैसे फ्लाइट आ रही है उसी तरह से छात्रों को निकाला जा रहा है। हालांकि अन्य दिनों के मुकाबले रोमानिया में भारतीय व अन्य देशों के छात्रों के लिए लगाए शिविर में फिलहाल खाना-पीना सही मिल रहा है।
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उधर यूक्रेन से सुरक्षित लौटे छात्रों व उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। साथ ही उन छात्रों के लिए भी दुआ व प्रार्थना की, जो अब भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। सरकार से भी मांग की कि जल्द से जल्द उन छात्रों को बुलवाया जाए। उधर, प्रशासन लगातार उन छात्रों के परिजनों से रोजाना संपर्क कर वहां की गतिविधियों से अवगत कराने के साथ-साथ उनका हौसला बढ़ा रहा है। जिले में बुधवार देर सांय भी करीब 10 बच्चे यूक्रेन से वापिस अपने घर पहुंचे हैं। इनमें चार छात्र हथीन के तथा तीन छात्र होडल के भी शामिल हैं।
तबाही के मंजर से निकले तो चेहरे पर लौटी रौनक
मिसाइल व बम धमाकों की आवाजें। पांच दिन तक होस्टल में बंद रहना। खाना नहीं मिलने पर बिस्कुट और पानी से भूख मिटाने के बाद गुरुवार को सुरक्षित लौटे हथीन उपमंडल के छात्रों के चेहरे पर रौनक दिखाई दी। अपने उन साथी छात्रों के प्रति भी थोड़ा दुख दिखाई दिया जो अभी तक नहीं लौट पाए हैं। उन्होंने घर पर मंदिर के सामने खड़े होकर उनके लिए भी सुरक्षित वापसी की दुआ मांगी।
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पांच किमी का पैदल सफर किया
हथीन उपमंडल के कुल चार छात्र यूक्रेन में औझोड़ से मेडिकल की पढ़ाई करने गए हुए थे। रूस-यूक्रेन में युद्ध छिड़ जाने के बाद वहां रहे रहे भारतीय विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों की भी टेंशन बढ़ गई थी। रूपडाका गांव निवासी सलीम ने बताया भारत सरकार ने वापसी के लिए अच्छे प्रबंध किए। हंगरी में बॉर्डर पार करने के लिए पांच किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ा।
चारों तरफ सायरन की आवाजें
मलाई गांव के मुबारिक खान ने बताया कि वहां भय का माहौल है। चारों तरफ सायरन की आवाजें हैं । घुड़ावली गांव के मुश्तकिम ने बताया कि रूस के हमले से यूक्रेन में भारी नुकसान हुआ है। वे अपने साथियों के साथ होस्टल में रहे। उनके पिता एवं पूर्व सरपंच धुपू ने कहा कि लोगों की दुआ एवं भारत सरकार के बेहतर प्रबंधों के चलते छात्र लौट आए हैं। घुड़ावली के इरफान भी घर आ गए हैं।
दहशत की कहानी सुनाई
यूक्रेन से सुरक्षित पहुंचे होडल निवासी प्रेम चंद बैनीवाल के पुत्र मयंक बैनीवाल का उनके परिजनों के साथ कॉलोनी के लोगों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। 25 फरवरी के बाद से ही लगातार हो रही भयावह बमबारी ने उनकी और उनके साथी छात्रों की नींद उड़ा दी थी। उन्होंने बताया कि कॉलेज के लगभग डेढ़ सौ छात्रों के साथ दो बसों में सवार होकर यूनिवर्सिटी से पोलैंड बार्डर पहुंचे। इस बीच कई जगहों पर उनके आईडी प्रूफों की जांच की गई। उन्होंने केवल ब्रेड आदि खाकर कई दिन का समय गुजारा। उन्होंने भी कई दिनों तक बंकर में रहकर समय गुजारा।
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