पलवल। गेहूं की बुआई का समय निकला जा रहा है और किसानों को अब तक डीएपी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। खाद की कमी के कारण किसान बुआई नहीं कर पा रहे हैं। खाद विक्रय केंद्रों में मारामारी का माहौल है। खाद लेने के लिए किसान घंटों भूखे-प्यासे लाइनों में खड़े रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। एक नवंबर को डीएपी के 24 हजार कट्टे आने पर किसानों को उम्मीद बंधी थी। लेकिन, फिर से स्टॉक खत्म होने से किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। रविवार को निजी खाद विक्रेताओं पर डीएपी आने की सूचना मिलते ही हजारों किसान दुकानों पर पहुंच गए, जिससे हालात बेकाबू हो गए और दुकानदारों को शटर बंदकर दुकानें बंद करनी पड़ी।
दरअसल, जिले में गेहूं व सरसों की बुआई के लिए करीब 14 हजार एमटी खाद की आवश्यकता है, जबकि अब तक यहां केवल साढे़ सात हजार एमटी खाद पहुंची है। इस बार बारिश के कारण पूरे जिले में एक साथ खेत बुआई के लिए तैयार कर दिए गए। पहले से ही खाद किल्लत से जूझ रहे जिले में बुआई का समय निकलने के डर से किसानों में खाद के लिए मारामारी मच गई। किसानों को खाद उपलब्ध कराने में सरकार के सभी इंतजाम धराशाई हो गए। देरी से आए खाद के कारण भी लोगों में डर का माहौल बन गया और खाद आते ही विक्रय केंद्रों पर भारी भीड़ जुटने लगी। बीती एक नवंबर को सरकारी डीएपी खाद का रैक पलवल पहुंचा, जिसे गांवों में बनी सोसाइटियों में भिजवा दिया गया। खाद लेने के लिए किसानों की भीड़ बेकाबू होने पर कई स्थानों पर पुलिस की देखरेख में खाद वितरित की गई। अब यह स्टॉक खत्म हो चुका है। कृषि विभाग विकल्प के तौर पर एनपीके खाद इस्तेमाल करने की अपील कर रहा है, लेकिन रेट ज्यादा होने के कारण किसान इस खाद को खरीदने के लिए तैयार नहीं है।
रविवार सुबह सोनीपत से करीब चार हजार कट्टा मोजेक नाम से डीएपी खाद निजी दुकानों पर आया। खाद आने की सूचना मिलते ही दुकानों पर किसानों की भीड़ जुटने लगी। इस खाद का रेट 1200 प्रति कट्टा था, इसलिए किसान इस खाद को लेने में रुचि दिखा रहे थे। दुकानों पर भीड़ इतनी ज्यादा हो गई कि करीब तीन घंटे में ही खाद का स्टॉक खत्म हो गया। ऐसे में दुकानदारों ने हाथ जोड़कर व दुकानों का शटर नीचे कर किसानों को वापस लौटा दिया।
दुकानों पर खाद आने की सूचना मिली तो लेने के लिए आया था, लेकिन यहां लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिली। दुकानदार स्टॉक खत्म होने की बात कर रहा है। बुआई के लिए खेत सूख रहे हैं। ऐसे में दोबारा सिंचाई कर बुआई करनी पड़ेगी।
- धर्मबीर, किसान निवासी लुलवाड़ी
----
जिले में अब तक 7,500 मीट्रिक टन डीएपी की आवक हुई है। अतिरिक्त खाद के लिए उच्चाधिकारियों को मांग भेजी गई है। तब तक किसान विकल्प के तौर पर बाजार में उपलब्ध अन्य खाद का प्रयोग कर बुआई कर सकते हैं।
- कुलदीप तेवतिया, एसडीओ, कृषि विभाग