संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले में कूड़े के ढेर में आग लगाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। एनजीटी और अदालत में कूड़े के ढेर में आग लगाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए शपथ पत्र देने के बावजूद नगर परिषद और राजमार्ग प्राधिकरण अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिस कारण आग लगने से उठने वाले जहरीले धुआं से जहां सांस व अस्थमा रोग से ग्रस्त मरीजों की हालत खराब हो रही है, वहीं वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। मौसम में परिवर्तन होने के साथ दिन में गर्माहट को कूड़े के ढेर में लगी आग और बढ़ा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यह बेहद खतरनाक है। इस बढ़ती भयंकर समस्या को लेकर न तो प्रशासन गंभीर है और न ही नगर परिषद तथा राजमार्ग प्राधिकरण।
जिले में शायद ही ऐसा कोई दिन होगा, जिस दिन कहीं न कहीं कूड़े के ढेर में आग लगती न मिले। नगर परिषद, सफाई व्यवस्था के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक हर महीने खर्च दिखा रहा है। उसमें शहर के अंदर से गंदगी व कूड़ा उठाना भी शामिल है, लेकिन उस कूड़े को उठाने के बजाय सफाई कर्मी सड़क किनारे डालकर उसमें आग लगा देते हैं। जिससे कूड़ा तो नष्ट हो जाता है, लेकिन आग लगाने से होने वाला प्रदूषण आसपास तथा शहर में सांस व अस्थमा की बीमारी को बढ़ावा देता है। स्वास्थ्य विभाग भी इस बारे में कई बार प्रशासन को लिख चुका है कि कूड़े में आग लगाने पर रोक लगवाई जाए, लेकिन अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए बैठक कर उसमें आदेश पारित कर देते हैं, परंतु कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता।
प्रदूषण का स्तर रहा 200 के करीब
लगातार कूड़ा जलाने के कारण जिले में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। हालांकि प्रदूषण का स्तर ज्यादा नहीं है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग की मानें तो यह खतरनाक मोड़ पर है। यदि कूड़ा इसी तरह से जलता रहा तो गर्मियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर अधिक बढ़ जाएगा और यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।
शहरी क्षेत्रों में इन स्थानों पर जलाया जा रहा कूड़ा
पलवल शहरी क्षेत्रों में सब्जी मंडी, अनाज मंडी, मीनार गेट, बाजार, पुराने जीटी रोड, पुरानी सब्जी मंडी, कैंप मार्केट, हुडा सेक्टर दो, ओमेक्स सिटी के पास कूड़ा जलाया जा रहा है। इनके अलावा राजमार्ग पर भी कई जगह कूड़ा जलता देखा जा सकता है। इसी तरह से गांव बामनीखेड़ा, लाडियाका, बाता, लुलवाडी सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर जलते देखे जा सकते हैं।
धुएं से बचकर रहने की सलाह
वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. धर्म प्रकाश आर्य का कहना है कि कूड़़ा जलाने से उठने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता है। उस धुआं से बचकर रहना चाहिए। सांस व अस्थमा के मरीजों को तो ऐसे स्थान पर जाने से ही बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग मुंह पर कपड़ा व मास्क पहनकर ही ऐसे स्थान पर जाएं। कोशिश करें कि जरूरत हो तभी जाएं। प्रशासन कूड़ा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाएं।
नगर परिषद के चेयरमैन डॉ. यशपाल का कहना है कि इस तरफ पूरा ध्यान है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी कूड़ा जलता मिले वहां जानकारी ली जाए कि कूड़ा किसने जलाया है, यदि कोई कोई जलाता मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस तरफ पूरा ध्यान दिया जाएगा।