हरियाणा में चौदह वर्ष पहले मद्रास से छुट्टी लेकर अपने गांव चेलावास आ रहा जवान भरतलाल अब तक अपने घर नहीं पहुंचा है। परिजनों ने उसे ढूंढने के लाख प्रयास किए, लेकिन सब विफल रहे।
जिला प्रशासन और वायुसेना यूनिट से कोई सहयोग न मिलने से परेशान पिता ने पुत्र वियोग में तड़प-तड़प कर प्राण त्याग दिए। रो-रोकर अपनी आंखें गंवा चुकी मां के पास जीवनयापन के लिए कोई सहारा नहीं बचा है। इसके बावजूद वह अपने बेटे के मिलने की आस में जीने के लिए संघर्ष कर रही है।
लापता युवा सैनिक की मां संतरा देवी ने बताया कि लगभग 22 वर्षीय भरतलाल 21 जुलाई 1995 में एयरफोर्स में भर्ती हुआ था। सर्विस के दौरान वह लंबे समय से बंगलूरू में ही कार्यरत था। भरत 23 मई 1999 को वायुसेना की एसटीई यूनिट बंगलूरू से छुट्टी लेकर अपने गांव चेलावास के लिए चला था।
उसने 23 मई को ही मद्रास से अपने घर फोन कर बताया था कि वह 25 मई को घर आ जाएगा। उसके आने की खबर सुनकर पूरे घर में खुशियां छाई हुई थीं, लेकिन जल्द ही यह माहौल गम में बदल गया। भरत 25 मई तक घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
इसके बाद भरतलाल के पिता हमीर सिंह ने 29 मई 1999 को कनीना थाने में अपने बेटे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद परिजनों ने एसटीई एयरफोर्स बंगलूरू कमांडेंट को फोन और पत्र द्वारा सूचित किया तथा प्रशासन से लापता बेटे को खोजने में मदद की गुहार लगाई, लेकिन न तो प्रशासन और न ही युवा सेना के अधिकारियों ने इस पीड़ित परिवार की कोई मदद की।
हालांकि वायु सेना के अधिकारी एक-दो बार खानापूर्ति के लिए बंगलूरू से चेलावास आए, लेकिन इसके बाद इस परिवार की किसी ने कोई सुध नहीं ली।