नारनौल। हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड जिला महेंद्रगढ़ के सभी पेड़ पौधे तथा जीव जंतु का डॉक्यूमेंटेशन करेगा। इसके लिए ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक जैव विविधता प्रबंधन समिति यानी बीएमसी बनाकर ग्रामीणों के सहयोग से संबंधित गांव व शहर के सभी पेड़ पौधे तथा जीव जंतुओं के बारे में लोक जैव विविधता रजिस्टर (पीबीआर) तैयार किया जाएगा। इस संबंध में उपायुक्त अजय कुमार ने सोमवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा टेक्नीकल स्पोर्ट ग्रुप की बैठक ली।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने विभागों से संबंधित सूचनाओं के संबंध में टेक्नीकल स्पोर्ट ग्रुप का सहयोग करें। यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। ऐसे में संबंधित एजेंसी तथा विभाग पूरी जिम्मेदारी के साथ इस काम को पूरा कराएं। डीसी ने बताया कि यह कार्य विभिन्न फेज में होना है। एजेंसी द्वारा शुरुआती कार्य सभी 346 ग्राम पंचायतों में हो चुका है। दूसरे फेज में 100 गांवों में यह समिति बनाई गई है। अब यह समिति गांव के हर पेड़ पौधे व पशुओं और जीव जंतु की नस्ल के बारे में लोक जैव विविधता रजिस्टर में जानकारी दर्ज करेगी। उस गांव में किस प्रकार की खेती होती है तथा कौन सा बीज अधिक प्रयोग किया जाता है इस तरह की सूचना भी दर्ज की जाएगी। गाय, भैंस की कौन सी नस्ल ज्यादा रखी जाती है तथा अन्य प्रकार के जीव जंतुओं की जानकारी एकत्रित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि एक बार सूचना एकत्रित होने पर जो पेड़ पौधे व जीव जंतु लुप्त होने के कगार पर हैं उनको दोबारा से बहाल करने की कोशिश की जाएगी ताकि स्थानीय स्तर की कोई भी जैव विविधता पूर्व की अवस्था में आ सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वनस्पतियों व जीव जंतुओं के पारंपरिक किस्म तथा नस्ल का संरक्षण होगा। बैठक में डीएफओ रोहताश सिंह, डीडीए डॉ. वजीर सिंह, डीडीए पशुपालन डॉ. नसीब सिंह, मत्स्य अधिकारी सोमदत्त, हरियाणा जैव विविधता बोर्ड के जिला कोऑर्डिनेटर देशराज शर्मा, एनएच कंस्लटेंटिंग से गजेंद्र सिंह यादव व चेनाराम के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
- लुप्त हो रही वनस्पतियों के बारे में पता लगाएगी समिति
उपायुक्त ने बताया कि अधिक जनसंख्या, अत्यधिक मानवीय हस्तक्षेप तथा प्राकृतिक संसाधनों के ज्यादा उपयोग से हम अपने बहुमूल्य प्राकृतिक एवं जैव संसाधनों को खोते जा रहे हैं। जैव विविधता अधिनियम 2002 के अनुसार लोक जैव विविधता रजिस्टर तैयार करते समय सभी जैव विविधताओं इसमें क्षेत्र की संस्कृति, अध्यात्म, पारंपरिक ज्ञान तथा जैव संसाधनों से संबंधित प्रचलित स्थानीय प्रथा का अभिलेखीकरण निर्धारित प्रारूप में किया जाएगा।
डीसी ने बताया कि हरियाणा में कई ऐसे पेड़ों की प्रजातियां हैं जिनकी संख्या बहुत ही कम हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले गूगल, रोहेड़ा, जाल तथा शल्लकी आदि के पेड़ बहुतायत मात्रा में होते थे लेकिन अब यह पेड़ बहुत ही कम बचे हैं। ऐसे में इन पेड़ों को संरक्षण के लिए यह कार्य उपयोगी सिद्ध होगा। इसके अलावा ढोसी पहाड़ पर भी प्राचीन समय में बहुत प्रकार की जड़ी बूटियां होना बताया गया है यह टीम ढोसी के पहाड़ पर मिलने वाली जड़ी बूटियों के बारे में भी पता लगाएगी।