कनीना। कनीना बस स्टैंड पर पिछले तीन माह से प्रतिदिन करीब 5 हजार यात्रियों को सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। यात्रियाें को प्रतिदिन हो रही परेशानी के बावजूद जिम्मेदारों ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की है।
50 वर्ष पूर्व बने कनीना बस स्टैंड के भवन को कंडम घोषित कर जिम्मेदारों ने तोड़ने में बड़ी तेजी दिखाई थी। अब प्रतिदिन सफर करने वाले करीब पांच से आठ हजार यात्रियों को धूप व बारिश से बचने के लिए आसपास की दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। बस स्टैंड पर पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है।
हरियाणा राज्य परिवहन निगम नारनौल के महाप्रबंधक अनित कुमार की ओर से गत मई में बस स्टैंड परिसर का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने यात्रियों के लिए एक टीन शेड लगाने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कहीं थी। तीन माह बीतने के बावजूद भी यह प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर पाया है। यात्रियों के साथ-साथ विभाग के कर्मचारी भी परेशानी उठा रहे हैं।
कनीना बस स्टैंड का शिलान्यास 22 दिसंबर 1974 में तत्कालीन हरियाणा राज्य विकास तथा परिवहन मंत्री कर्नल महा सिंह ने किया था। 50 वर्ष पुराने भवन की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई थीं व छत का लेटर गिरने लगा तो लोक निर्माण विभाग ने इसे जर्जर घोषित कर दिया था। विभाग द्वारा बस स्टैंड के भवन को गिराने के तीन माह का समय बीत गया, लेकिन यात्रियों के ठहरने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है।
कनीना बस स्टैंड से प्रतिदिन करीब 150 बसें होती हैं रवाना
कनीना बस स्टैंड से प्रतिदिन महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, चंडीगढ़, रोहतक, कोसली, दादरी, अटेली सहित प्रदेश के कई डिपो की करीब 150 बसें यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाती हैं। इन बसों में प्रतिदिन पांच से आठ हजार यात्री सफर करते हैं। बस स्टैंड का भवन नहीं होने के कारण यात्रियों को खुले आसमान तले खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
कनीना बस स्टैंड के नए भवन का प्रस्ताव विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा हुआ है। इसके लिए सभी प्रकार की औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। अभी हाल ही में इसका निर्माण शुरू होना था, लेकिन आचार संहिता लग चुकी है। जैसे ही आचार संहिता समाप्त होती है शीघ्रता से वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी।
-अनित कुमार, जीएम रोडवेज विभाग महेंद्रगढ़