नारनौल। शिवरात्रि को लेकर बुधवार को शहर के मंदिर और शिवालयों में दिनभर बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालु सुबह से ही भगवान शंकर को जलाभिषेक करने के लिए शिवालय पहुंचने लगे। शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसलिए श्रद्धालुओं ने बुधवार को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रूद्राभिषेक भी किया। सुबह शहर के मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
इसमें सबसे ज्यादा भीड़ शहर के प्राचीन मोड़ावाला मंदिर व छोटा-बड़ा तालाब शिव मंदिर में रही। यहां लोगों को जलाभिषेक करने के लिए काफी देर इंतजार भी करना पड़ा। लोगों ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए दूध, दही, शहद, भांग, धतूरा, फल, फूल व बेलपत्र आदि चढ़ाकर जलाभिषेक किया।
शिवरात्रि को लेकर शहर के कई मंदिरों में हरिद्वार से कांवड़ भी लाई गई। उसके गंगाजल से भगवान शंकर का अभिषेक किया गया। लोग ढोल-बाजों के साथ नाचते हुए कांवड़ को लेकर शिव मंदिरों तक पहुंचे। डाक कांवड़ के दौरान भी डीजे के साथ बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे। डाक कांवड़ के माध्यम से भक्तजन 24 घंटे में हरिद्वार से गंगाजल लेकर शहर में पहुंचे और भगवान शंकर को अर्पित किया।
शहर के प्राचीन मोड़ावाला मंदिर में तीन डाक कांवड़ और 40 कांवड़ चढ़ाई गई। इसी तरह छोटा-बड़ा तालाब पर भी चार डाक कांवड़ व 20 के करीब कांवड़ चढ़ाई गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में तीन डाक कांवड़ से भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में स्थित अनेक मंदिरों के अंदर भी 40 के करीब कांवड़ आई, जिसके गंगाजल से भगवान शंकर का अभिषेक किया गया। मोड़ावाला मंदिर में जाप कर रहे आचार्य शशिकांत ने बताया कि कांवड़ चढ़वाने के अलावा मंदिर में तीन रुद्राभिषेक भी करवाए गए।