गांव पाथेड़ा निवासी किसान के बेटे ने कबड्डी में देश को पदक दिला जिले का मान बढ़ाया है। गांव की मिट्टी में खेल कर सचिन तंवर ने प्रतिभा निखारी है। प्रो कबड्डी के सीजन 5 से शुरुआत की थी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम कई उपलब्धियां हैं।
चीन में संपन्न हुए एशियन गेम्स की पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। इसी टीम में महेंद्रगढ़ जिले के गांव पाथेड़ा में जन्में सचिन तंवर भी शामिल थे। सचिन की टीम द्वारा गोल्ड मेडल जीतने पर पूरे परिवार व गांव में खुशी का माहौल है। घर पर बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है। ग्रामीणों ने कहा की सचिन की उपलब्धि पर पूरे गांव को गर्व है। गांव में पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
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सचिन फिलहाल राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं। पांच बार प्रो कबड्डी भी खेल चुके हैं। सचिन के पिता सतीश सिंह सामान्य किसान हैं और उन्होंने कर्ज लेकर बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया है।
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खेल का जुनून ऐसा खूब खाई बचपन में मां की डांट
सचिन तंवर ने कक्षा पांचवीं से ही कबड्डी सीखनी शुरू कर दी थी। बड़े भाई दीपक तंवर व मामा राकेश चौहान से कबड्डी की सीख से मैदान में उतरने के बाद सचिन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2016 में जूनियर इंडिया के कैंप के लिए दसवीं की परीक्षा भी छोड़ दी थी। खेल के प्रति दीवानगी के कारण सचिन को बचपन में माता-पिता की खूब डांट खानी पड़ी थी। सचिन जिस दिन ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतियोगिता होती थी उससे पहले रात भर अपनी माता को मनाते थे कि पापा से कहकर स्कूल जाने की जगह खेलने की अनुमति दिला दें। बचपन से दाल चूरमे एवं देसी घी के शौकीन सचिन तंवर प्रो कबड्डी के सीजन 5 से शुरुआत करने के बाद सीजन 9 तक लगातार अपने बेहतर प्रदर्शन से चयन कर्ताओं का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं।
वर्तमान में राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर हैं तैनात
सचिन तंवर इस समय राजस्थान पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर तैनात हैं। सचिन के बड़े भाई दीपक भी कबड्डी के राष्ट्रीय स्तर के प्लेयर रहे हैं और राजस्थान पुलिस में ही सब इंस्पेक्टर हैं।
पिता सतीश सिंह व माता राधा देवी ने संघर्षों से पहुंचाया बेटे को इस मुकाम तक
अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए पिता सतीश सिंह व माता राधा देवी ने साधारण किसान परिवार से होते हुए भी बड़ा संघर्ष किया है। साधारण परिवार से होने के कारण आर्थिक चुनौतियां भी उनके समक्ष खड़ी थी लेकिन बेटे ने भी कामयाबी के झंडे बुलंद कर दिए।