प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई जल जीवन मिशन की समीक्षात्मक वीडियो कांफ्रेंसिंग में अधिकारियों को पेयजल की मात्रा गुणवत्ता व निरंतरता पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। अधीक्षक अभियंता विजेंद्र सिंह हुड्डा ने सभी कार्यकारी अभियंता, उपमंडल अभियंता, जेई, वॉसो स्टाफ को निर्देश दिए कि ग्रामीण व शहर के सभी नागरिकों को शुद्ध पेयजल समय पर लगातार मिलता रहे इसके लिए हर कर्मचारी मुस्तैद रहे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में डेंगू का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। डेंगू का मच्छर पनपने का कारण साफ पानी का लगातार लंबे समय पर एकत्रित होना बताया गया है। डेंगू के प्रकोप से आमजन को बचाने के लिए जिस प्रकार स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस रखी है। उसी प्रकार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को कहीं कोई लापरवाही नहीं बरतनी है। पीने के पानी की लगातार जांच जिसमें जीवाणु परीक्षण व रसायन जांच भी जरूरी है। इसके लिए एच 2 एस किट के अलावा नारनौल की जिला लैब में भी हर गांव के प्रत्येक सोर्स का सैंपल जांचा जाए।
जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने बताया कि जन स्वास्थ्य विभाग व वॉसो की टीम ग्राम जल एवं सीवरेज समिति सदस्यों को एच 2 एस किट से पीने के पानी का जीवाणु परीक्षण करने की विधि बताई जा रही है। वहीं जिले में नांदी फाउंडेशन के चल रहे आई प्योर वाटर प्लांट के पेयजल का जीवाणु परीक्षण के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन द्वारा सामुदायिक विशेषज्ञ मणिप्रकाश को भी एफटीके एच 2 एच किट वितरित की गई है।