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मूसनोता की तर्ज पर पाचनोता के पहाड़ में बनाए जाएंगे तीन बांध

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नारनौल। मूसनोता की तर्ज पर अब पाचनोता की पहाड़ियों में जल संचय किया जाएगा। मंगलवार सुबह पाचनोता की पहाड़ियों में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। इस मौके पर विधायक अभय सिंह भी मौजूद रहे। विधायक अभय सिंह ने तीन अलग-अलग बांधों के स्थल का निरीक्षण कर जल संचय की दूसरी संभावनाओं पर विचार विमर्श किया। इन पहाड़ियों में तीन अलग-अलग पक्के बांधों के निर्माण के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया।
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डॉ. यादव ने बताया की अरावली की पहाड़ियों में जल संचय का प्रयास कई साल पहले प्रारंभ हो चुका था, जब मिट्टी से कच्चे चेक डैम बनाकर जल संचय का प्रयास किया गया था। यह प्रयोग काफी सफल रहा तथा नांगल चौधरी विधानसभा स्थित अरावली क्षेत्र में 100 से अधिक ऐसे बांध उपलब्ध हैं परंतु भारी वर्षा के समय यह बांध पानी को पूरी क्षमता में रोक नहीं पाते एवं मिट्टी के कटाव से बांध टूट जाते रहे हैं। जब ऊपरी क्षेत्र का कोई बांध टूटता है तो उससे नीचे स्थित बांध भी टूटने लगते हैं। इस व्यवस्था को स्थाई रूप प्रदान करने के लिए डा. यादव ने इन बांधों को पक्का करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा तथा सरकार द्वारा अब प्रति वर्ष बांधों को पक्का करने का बजट प्राप्त होने लगा है। इस कड़ी में 17 बांध या तो पक्के हो चुके हैं या उन पर काम चल रहा है। मूसनोता तर्ज पर अब पाचनोता की पहाड़ियों में भी तीन बड़े बांध बनाए जाएंगे। जिनमें बड़े स्तर पर जल संचय की क्षमता होगी। इसी तरह अन्य मिट्टी के बांधों को भी पक्का करने का सिलसिला आगे बढ़ेगा।
डॉ. यादव ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य पूरे जिले की जल व्यवस्था में स्थाई सुधार करने का है और इसके लिए वर्षा की ऋतु में उपलब्ध नहरी पानी एवं स्थानीय पहाड़ियों में वर्षा के पानी का अधिकतम संचय करके अधिक से अधिक पानी को भूगर्भ में संचय करने का है। ताकि क्षेत्र के ट्यूबवेल काम कर सकें। पहाड़ी क्षेत्र में वर्षा के जल को संचय करने की अपार संभावनाएं हैं। इस काम को सरकार द्वारा बखूबी आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री की पहल पर इस वर्ष विशेष रूप से महेंद्रगढ़ जिले में जल भंडारण के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस व्यवस्था को प्रभावशाली बनाने के लिए यमुना नदी से अधिकतम पानी पश्चिमी यमुना नहर के दक्षिणी जिलों के कमांड एरिया में लाने के लिए ऊपरी क्षेत्र की नहरों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजना पर पहले ही काम प्रारंभ हो चुका है जिसमें जवाहरलाल नेहरू फीडर कैनाल की क्षमता बढ़ाने और उसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रगति पर है। इसी कड़ी में सीवरेज प्लांट द्वारा परिष्कृत जल को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना पर काम भी अगले 1 महीने में प्रारंभ होगा। जिसमें नारनौल स्थित तीन ट्रीटमेंट प्लांटस परिष्कृत पानी गोद, बलावा, भांखरी और बलाह कलां समेत 4 गांवों की भूमि को सिंचाई उपलब्ध करवाएगा। 40 करोड़ से अधिक की इस योजना पर अगले कुछ दिनों में काम प्रारंभ हो रहा है जिसमें 15 किलोमीटर की दूरी पर प्रेशर पाइप से पानी ले जाकर लगभग 65 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन खेतों में डाली जाएगी जहां हर 4 एकड़ पर पानी का एक आउटलेट दिया जाएगा और सूक्ष्म सिंचाई द्वारा खेती को आधुनिक प्रणाली से सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध होगी।
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