लघु सचिवालय में ज्ञापन सौंपते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के सदस्य
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महेंद्रगढ़। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के सदस्यों ने शुक्रवार को जाति आधारित जनगणना करवाने, कृषि कानूनों को वापस लेने, ईवीएम पर रोक लगाने सहित अन्य मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा। एसडीएम कार्यालय सुप्रिंडेंट सुदेश पुनिया को सौंपे ज्ञापन में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अभी कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर यह बात निश्चित कर दी गई कि केंद्र सरकार ओबीसी की जाति आधारित जनगणना 2022 की जनगणना में भी नहीं कराएगी।
मोर्चा कार्यकारिणी सदस्य बहादुर सिंह ने कहा कि आजाद भारत में ओबीसी की जनगणना या फिर जाति आधारित जनगणना एक बार भी नहीं की गई है इसके कारण पिछड़े वर्ग के सही आंकड़े ही नहीं आए हैं। इसके कारण ओबीसी की विकास की योजनाएं एवं शासन प्रशासन में उनका प्रतिनिधित्व देने की नीतियां समुचित तरीके से नहीं बन पाई और पिछड़ा वर्ग आजादी के 74 वर्ष में भी अधिकार से वंचित रह गया।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून किसानों के विरोध में है, इससे किसान पूरी तरह से पूंजीपतियों के अधीन हो जाएगा एवं खाद्यान्न, दलहन, तिलहन के मजदूर एवं तमाम गरीब तबके के लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 अक्तूबर 2013 कोई निर्णय दिया कि केवल ईवीएम मशीन से स्वतंत्र निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव नहीं हो सकता इसलिए ईवीएम के साथ में पेपर ट्रेल मशीन लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में ईवीएम घोटाले को रोकने के लिए मशीन लगाई जा रही है। लेकिन जब तक पेपर ट्रेल से निकलने वाली पर्चियों का शत प्रतिशत मिलान नहीं कराया जाता तब तक स्वतंत्र निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों का वर्ष अप्रैल 2004 से बंद पुरानी पेंशन बहाल किया जाए, निजीकरण समाप्त किया जाए सहित अन्य मांगे हैं। ज्ञापन में बताया कि तीसरा चरण 12 नंवबर को तहसीलों पर धरना प्रदर्शन व ज्ञापन, चौथा चरण 25 नंवबर तहसीलों में रैली प्रदर्शन एंव जेलभरों आदोलन और पांचवा चरण में 10 दिसंबर भारत बंद का ऐलान किया जाएगा। इस मौके पर बहादुर सिंह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा जगदीश, लालाराम, अमर सिंह राठौड़, सुरेश, शिव हरी, सतबीर, पवन कुमार आदि उपस्थित रहे।