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पटाखों की धुआं ने वायु में घोला जहर, नारनौल की एक्यूआई का स्तर पहुंचा 377

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नारनौल एक्यूआई। - फोटो : Narnol
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खुशियों की दिवाली पर्यावरण में जहर घोल गई। पटाखों के धुआं और शोर से जिले में जमकर प्रदूषण हुआ। जिले में शुक्रवार को प्रदूषण में 10 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। हालांकि प्रदूषण के आंकड़े महानगरों के मुकाबले कम दर्ज किया गया लेकिन जिले के लिहाज से प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है। दिवाली पर जिलेभर में करोड़ों रुपये के पटाखे स्वाहा हुए।
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पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद भी शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर पटाखों की बिक्री हुई। पटाखों से निकलने वाला धुआं व धूमधड़ाके ने वीरवार को लोगों की धड़कनों में इजाफा कर दिया। एक ओर जहां प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ। वहीं दूसरी ओर कानफोड़ू शोर ने लोगों को परेशान किया। दिवाली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। इस बार प्रदूषण में 10 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया।
प्रदूषण बोर्ड के अनुसार नारनौल शहर में शुक्रवार की शाम 4 बजे हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 का स्तर 377 रहा है, जो बहुत खराब स्तर का है। ऐसे में शहर में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में भी यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में सांस के मरीजों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। बता दें कि शून्य और 50 के एक्यूआई को अच्छा, 51 और 100 तक की एक्यूआई को संतोषजनक, 101 और 200 मध्यम, 201 और 300 खराब, 301 और 400 बहुत खराब और 401 और 500 तक के एक्यूआई को गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
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पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। डॉ. संदीप यादव कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा और ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। वहीं धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं। लोगों को इनसे बचने की जरूरत है।
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