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सात दिन में तीसरी बार टिड्डी दल का हमला सतर्कता से नहीं रुक पाया, राजस्थान चला गया

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राजस्थान की ओर से आए टिड्डी दल का वीरवार को महेंद्रगढ़ जिले में तीसरा हमला हुआ। इससे पहले 26 और 30 जून को भी जिले में टिड्डी दल का हमला हो चुका है। तीनों ही बार जिला प्रशासन व किसानों की सजगता से टिड्डी दल जिले में नहीं रुक पाया। शाम तक यह दल राजस्थान की तरफ चला गया। उपायुक्त आरके सिंह वीरवार को दिन भर कृषि विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश देते रहे। दल करीब तीन किलोमीटर लंबा और दो किलोमीटर चौड़ाई में चल रहा था। हालांकि राजस्थान में दोनों एक साथ हो गए।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंदर सिंह सैनी ने बताया कि टिड्डी दल का एक समूह राजस्थान की ओर से आकर निंबी व चिंडालिया साइड से होते हुए बापडोली व हाजीपुर से नारनौल को क्रॉस करके नांगल चौधरी व निजामपुर खंड की ओर चला गया। उसके बाद राजस्थान में प्रवेश कर गया। वहीं दूसरा ग्रुप निजामपुर खंड के दंचौली साइड से आया था। यह समूह निजामपुर के आसपास पवेरा व सरेली के आसपास घूमता रहा और शाम तक दल राजस्थान की तरफ चला गया। इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों ने राजस्थान के अधिकारियों को भी पहले ही सूचित कर दिया था ताकि रात होने के बाद वहां पर राजस्थान कृषि विभाग के अधिकारी उन पर दवाई का छिड़काव करके उन्हें वहीं पर नष्ट कर सकें।
डॉ. सिंह ने बताया कि हाल में राजस्थान से हुई बारिश के बाद टिड्डी के प्रजनन के कारण संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि किसानों की सतर्कता से कम नुकसान हुआ है। वहीं इस बार टिड्डी दल नसीबपुर गांव से नारनौल शहर होते हुए नांगल चौधरी से राजस्थान में प्रवेश कर गया। लोगों ने ठोल, थाली, डीजे और पटाखे बजाकर टिड्डियों को भगाया। सिंह ने बताया कि जिले में दो टिड्डी दल अलग-अलग जगहों से जिले में प्रवेश किया। दोनों करीब तीन किलोमीटर लंबा और दो किलोमीटर चौड़ाई में चल रहा था। हालांकि राजस्थान में छह किलोमीटर लंबा और तीन किलोमीटर चौड़ाई में हो गया था। जिले में करीब छह दर्जन गांवों से होकर गुजरा।
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सोशल मीडिया का रहा सकारात्मक रोल : डॉ. हरपाल
सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी हरपाल सिंह यादव ने बताया कि टिड्डी दल के बारे में जिले के किसानों को हर पल की जानकारी दी जा रही है। जिला के सभी कृषि अधिकारी किसानों का ग्रुप बनाकर उन्हें अलर्ट करते रहे। उन्होंने बताया कि तकनीकी के इस दौर में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा रोल है। इसी सोशल मीडिया के कारण तीन बार जिले में टिड्डी दल का हमला नाकाम हुआ है। किसानों को हम सही समय पर सूचना दे पा रहे हैं। सोशल मीडिया का इस मामले में बहुत बड़ा फायदा हो रहा है। सूचना मिलते ही किसान अपने अपने खेतों में पहुंचकर विभिन्न यंत्रों से शोर करके इनको भगाने में कामयाब रहे हैं। सही समय पर सही सूचना मिलना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। इस संबंध में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा सकारात्मक रोल रहा है।
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