नारनौल। कुकसी से मंदोला स्टेट हाईवे 148बी पर काम शुरू नहीं होने से वाहनों चालकों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 18 वर्षों से जर्जर हाईवे का काम कभी बजट तो कभी पेड़ काटने की परमिशन नहीं मिलने के कारण रुक रहा है। हाईवे के निर्माण के लिए कई बार बजट भी पास हुआ और पेड़ काटने की परमिशन भी मिली। लेट लतीफी के कारण कभी महंगाई बड़ी तो कभी काम समय शुरू होने में ज्यादा समय लगने के कारण निर्धारित से ज्यादा पेड़ कटान की जद में आने लगे। इस कारण इस जर्जर सड़क का पुनर्निर्माण नहीं होने से क्षेत्र के लोगों में सरकारों के प्रति आक्रोश है। 54 किलोमीटर लंबे इस जर्जर सड़क के दोनों तरफ स्थित 12 गांवों के अलावा अन्य राज्यों के वाहन चालक भी प्रभावित हैं।
एक महीने पहले हरियाणा स्टेट रोड एंड ब्रिज डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआरडीसी) की तरफ से अप्रैल प्रथम सप्ताह में इसका रिवाइज एस्टिमेट बनाकर भेजा है। एक माह से ऊपर का समय बीतने के बाद अभी तक इसकी मंजूरी नहीं आई है। वहीं दिसंबर माह में पेड़ों की कटाई के लिए भेजी गई मंजूरी भी नहीं आई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार इस रोड के प्रति कितनी गंभीर है। अभी इसकी प्रक्रिया में समय लगेगा। वैसे अगले महीने के अंत तक मानसून शुरू हो जाएगा जो अगस्त - सितंबर माह तक चलेगा। अक्तूबर से रोड पर कार्रवाई शुरू हो सकती है। तब तक क्षेत्र के वाहन चालकों को जर्जर रोड से ही होकर गुजरना होगा।
बता दें कि 2021 में सरकार की तरफ से 296 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। इसके बाद 16 नवंबर को टेंडर लगाए गए जो 4 जनवरी को ओपन किए गए थे। एक कंपनी का आवेदन आने के कारण टेंडर रिकॉल करना पड़ा। इसके फरवरी माह में टेंडर ओपन हो गए थे। इस बार दो कंपनियों ने आवेदन किया था। इसी माह में फाइनेंसियल बीड भी ओपन हो गई थी लेकिन बाद एक टेंडर अलॉट करने में एक माह का समय लगा दिया। इस दौरान दोबारा 510 करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेेट बनाकर भेज दिया।
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टेंडर ओपन होने के बाद क्यों बढ़ाया 210 करोड़ का बजट
स्टेट हाईवे के टेंडर ओपन होने के बाद सरकार द्वारा 210 करोड़ रुपये का बजट बढ़ाने पर सवाल उठ रहे हैं। फरवरी माह में टेंडर ओपन हो गए थे। दो कंपनियों ने टेंडर लगाए थे। वित्तीय बीड भी खुल गई थी। केवल टेंडर अलॉट किए जाने थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 210 करोड़ रुपये का बजट बढ़ा दिया। अधिकारियों का मानना है कि महंगाई की वजह से 40 प्रतिशत निर्माण सामग्री के दाम बढ़ गए हैं, दूसरा सरकार पीपीपी मॉडल के तहत रोड बनवाएगी। जब अधिकारियों का 40 प्रतिशत महंगाई का दावा भी झूठा साबित हो रहा है क्योंकि 16 नवंबर 2021 में पहली बार टेंडर लगे थे उसके बाद दो बार रिकॉल भी हुए हैं। तीन चार माह में 40 प्रतिशत महंगाई नहीं बढ़ सकती। दूसरा ठेकेदार उस राशि में काम करने को खुश थे इसलिए उन्होंने आवेदन किया था। अगर सरकार को पीपीपी मॉडल के तहत बनवाना था तो पहले भी यह कदम उठा सकती थी।
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महेंद्रगढ़ क्षेत्र से भेदभाव क्यों ?
सूबे में चाहे किसी की भी सरकार रही हो लेकिन हमेशा महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भेदभाव होता रहा है। पहले इस रोड का डीनोटिफाई कर नेशनल से स्टेट हाईवे कर दिया। दूसरा उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला के विधानसभा बाढड़ा से लगते करीब 15 किलोमीटर रोड बना दिया गया, लेकिन अभी तक मंदोला से कुकसी तक रोड निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। अंतिम समय में यह रोड 2002 में चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के समय बनाया गया था। उसके बाद दस साल कांग्रेस और साढ़े सात साल से भाजपा का शासन है लेकिन अभी तक यह रोड नहीं बनी है।
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नहीं मिली पेड़ों की कटाई की अनुमति
यह इस क्षेत्र का दुर्भाग्य ही है कि यहां विकास होता ही नहीं है, या फिर उसमें कोई न कोई अड़चन आ जाती है। स्टेट हाईवे के लिए पेड़ों की कटाई भी एक अड़चन बनी हुई है। 2012 में इस रोड पर लगते पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल गई थी, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि दस वर्षों में पेड़ों की संख्या बढ़ गई है। इस वजह से पेड़ों के लिए दोबारा अप्रूवल मांगी गई है। छह माह बीत जाने के बाद अभी तक पेड़ों को काटने की मंजूरी तक नहीं मिली है।
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वर्जन
हमने इसका प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। अप्रूवल होते ही इस पर काम शुरू करवा दिया जाएगा। सरकार सड़कों को लेकर बहुत गंभीर है। - अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग।
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