कॉलेज विद्यार्थियों का कहना है कि हिंदी हमारी राजभाषा होने के साथ-साथ विश्व की प्राचीन और सरल भाषाओं में से एक है। हिंदी भाषा केवल भारत में ही नहीं विदेशों तक फैल रही है। मगर हम हमारी राष्ट्रभाषा को छोड़कर अंग्रेजी भाषा की भाग रहे है। जबकि हिंदी भाषा हिंदुस्तान को एक सूत्र मे बांधने का काम करती है।
हिंदी हमारी मातृ भाषा है, परंतु अभी तक हिंदी भाषा को भारत में सही मायने राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ हैं। हमारे देश में आज भी 70 प्रतिशत अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता है। जबकि 30 प्रतिशत हिंदी भाषा बोली जाती है। आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और मातृभाषा को पीछे छोड़ती जा रही है और अंग्रेजी भाषा को अपना रही है। हम अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करे, परंतु हमारी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए। अंग्रेजी, स्पेनिश व मंदारिन के हिंदी चौथी ऐसी भाषा है जो दुनियां में सबसे ज्यादा बोली जाती है इसलिए हमें अपनी मातृभाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अभियान चलाना होगा। - भारत सैनी, छात्र ।
14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का पूर्ण दर्जा प्राप्त हुआ था लेकिन देखने में लगता है कि आज भी हिंदी को देश में पूर्ण दर्जा नहीं मिल पाया है। आज की युवा पीढ़ी हिंदी की बजाय अंग्रेजी भाषा को महत्व दे रही है। स्कूलों में भी बच्चों केेेे हिंदी से अधिक अंग्रेजी भाषा पढ़ाई जा रही है। यहीं नहीं सरकारी कार्यों में भी हिंदी की बजाय अंग्रेजी को महत्व दिया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह अपने सभी कार्यों में हिंदी का प्रयोग करें। आज पहले जैसी भाषा, सभ्यता और संस्कृति नहीं रही।
-कोमल, छात्रा।
विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा भी है। किसी भी देश की राष्ट्र भाषा उस देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने मे अहम भूमिका निभाती हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, शहरी से ग्रामीण तक, साक्षर से निरक्षर तक प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति हिंदी भाषा को आसानी से बोल समझ लेता है। हिंदी हिंदुस्तान को एक सूत्र मे बांधने का काम करती है। इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। यह भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। हिंदी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज हिंदी विश्व मे तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गई हैं। -हरीओम कोचर, छात्र।