गांव तोताहेड़ी में बना पपीता का घर।
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चंडीगढ़ में आरबीआई के ट्रकों की हुई भीषण टक्कर में जिले के गांव तोताहेड़ी की बेटी महिला सिपाही पपीता बुरी तरह घायल होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि पिता के निधन के बाद पपीता पर ही परिवार की जिम्मेदारी है। तीन बहनों में सबसे छोटी पपीता चंडीगढ़ पुलिस में बतौर सिपाही तैनात है। एक छोटा भाई रवींद्र नारनौल आईटीआई में पढ़ाई कर रहा है। दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है जबकि पपीता अविवाहित है। घटना की सूचना के बाद से पूरे गांव वासी उसके स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं क्योंकि पपीता ही घर में एक कमाने वाली है।
पपीता की बड़ी बहन शर्मिला ने बताया कि परिवार व छोटे भाई की पढ़ाई का सारा खर्चा पपीता ही चलाती है। एमकॉम, एमए व बीएड की पढ़ाई कर चुकी पपीता बचपन से ही पुलिस में भर्ती होकर समाज सेवा करना चाहती थी। उसने अपनी मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया। पपीता 2018 में चंडीगढ़ पुलिस में सिपाही भर्ती हुई। ट्रेनिंग पूरी कर जनवरी 2021 में चंडीगढ़ में ड्यूटी ज्वाइन की। गत माह 25 अगस्त को पपीता 3-4 दिन की छुट्टी लेकर अपने गांव आई थी। पपीता हमेशा अपने छोटे भाई व मां का अच्छे से ख्याल रखती है। मगर पपीता के ड्यूटी के दौरान घायल होने की सूचना जैसे उन्हें मिली परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पपीता की मां व छोटा भाई उसके पास पहुंच गए।
इस घटना से परिवार ही पूरे गांव में शोक बना हुआ है। जून माह में पपीता के पिता शीशराम का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद से पूरे परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी पपीता पर ही आ गई है। ऐसे में पूरा गांव बेटी के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। ग्रामीण सुभाष, दर्शन व रामकिशन ने बताया कि पपीता गांव ही नहीं पूरे जिले के लिए आदर्श है जिसने विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाई कर अपने आपको काबिल बनाया। पपीता गांव की अन्य बेटियों के लिए भी मिसाल है। वह हमेशा पढ़ाई में अव्वल आती थी। लोगों ने कहा कि उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा है वे बेटी पपीता को जल्द स्वस्थ कर घर भेजेंगे।
पपीता छह सिंतबर को चडीगढ़ सेक्टर-26 में आरबीआई के ट्रकों की भिड़ंत में फंसकर घायल हो गई थी। जिसे क्रेन की सहायता से बाहर निकाला गया था। इसमें उसके दोनों पैर क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद पपीता पीजीआई में भर्ती करवाया गया। पीजीआई ट्रामा सेंटर में उसके पैरों की सर्जरी हुई लेकिन अभी चिकित्सक भी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे है कि पपीता को फिर से अपनों पैरों पर खड़ा होने में कितना समय लगेगा।