कनीना। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग महेंद्रगढ़ द्वारा उपमंडल के गांव भड़फ में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, खाद कीटनाशकों की जानकारी दी गई।
एडीओ डॉ. योगेश यादव ने बताया कि प्राकृतिक कृषि जैविक कृषि से भिन्न है, क्योंकि जैविक कृषि में खादों एवं जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है, जबकि प्राकृतिक कृषि में प्रकृति प्रदत्त उत्पादों एवं साधनों का उपयोग किया जाता है। इसमें उत्पादन को प्रकृति की शक्ति माना जाता है तथा कृषि कर्षण क्रिया कम से कम की जाती है। डॉ. मनीषा यादव ने किसानों को कहा कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद, गोबर खाद, जैविक खाद, केचुआ खाद एवं जहरीले कीटनाशक, रासायनिक खरपतवार नाशक, रासायनिक फफूंद नाशक नहीं डालना चाहिए। किसानों की पैदावार का आधा हिस्सा उनके उर्वरक, खाद, कीट एवं रोग नाशकों में चला जाता है।
यदि किसान खेती में अधिक मुनाफा या फायदा कमाना चाहता है तो उसे प्राकृतिक खेती की तरफ अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक खेती के उत्पाद जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत के बारे में विस्तार से चर्चा की। डॉ. अरविंद यादव ने बताया जीवामृत गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन एवं पीपल एवं बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी से बनाते हैं। यह जीवामृत जब सिंचाई के साथ खेत में प्रयोग किया जाता है, तो भूमि जीवाणुओं की संख्या तीव्र गति से बढ़ती है एवं भूमि के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में सुधार होता है। इस दौरान डॉ. महेश कुमार, ओमप्रकाश, कर्मपाल, महावीर, वेद बोहरा, होशियार सिंह, सुमेर सिंह, राजवीर, हरीश कुमार बोहरा, देवदत्त, राजवीर सिंह रविप्रकाश, महेंद्र सिंह, राजकुमार यादव सहित अन्य मौजूद रहे।