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फैमिली आईडी आने से कई बुजुर्गों को जमा करवानी पड़ रही है बुढ़ापा पेंशन

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पेंशन के लिए आय प्रमाणपत्र लोगों की गले की फांस बन रहा है। जिले में करीब आठ सौ लोगों की पेंशन रुकी हुई है। सरकार ने दो लाख से अधिक आय को आधार मानकर बुजुर्गों की पेंशन काटने की बात कर रही है, जिससे बुजुर्गों की परेशानी बढ़ा दी है। जब से सरकार ने फैमिली आईडी को पेंशन से जोड़ा है तो अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो गए। क्योंकि जिले में ऐसे बुजुर्ग भी हैं जो एक साथ दो पेंशन ले रहे हैं। इसका खुलासा फैमिली आईडी से हुआ है।
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सरकार के नियम के अनुसार सरकारी सेवा से निवृत्त व्यक्ति को सरकार की ओर से पेंशन मिलती है। अगर उसकी मृत्यु हो जाती है और उसकी पत्नी बुढ़ापा पेंशन ले रही है तो पेंशन के लिए फार्म अप्लाई करते समय समाज कल्याण विभाग से पेंशन लेने का डाटा दिखाई देता है। उसके बाद पेंशनर्स को समाज कल्याण विभाग की एनओसी लेकर संबधित विभाग में जमा करवाकर पारिवारिक पेंशन के लिए अप्लाई करना पड़ता है। जिसके लिए समाज कल्याण विभाग पेंशन की रिकवरी कर अपनी एनओसी जारी करता है। ये सब फैमिली आईडी के जोड़ने से संभव हुआ है। जिससे समाज कल्याण विभाग में रिकवरी करवाने वालों की लाइन देखी जा सकती है। जिला महेंद्रगढ़ की बात करें तो रोजाना एक दो लोग पेंशन की रिकवरी जमा करवाकर सामाजिक कल्याण विभाग से एनओसी लेकर अपने परिजन की फैमिली पेंशन बनवा रहे हैं। बता दें कि सरकार ने पेंशन के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य कर रखा है जिससे पेंशनधारकों की आय का खुलासा होने लगा है। जमीन मालिक समेत सरकारी नौकरी पेशा वालों के परिजन पेंशन ले रहे हैं। पहले परिवार पहचान पत्र नहीं होने के कारण उनकी आय की जानकारी नहीं लग पाती थी और पेंशन लेते रहते थे। अब ऑनलाइन में परिवार पहचान पत्र से पता चल जाता है कि आईडी में जुड़े सदस्यों की कुल आय कितनी है। संवाद
जिले में कई लोग दो पेंशन ले रहे हैं। जिन्होंने पहले गलत जानकारी देकर बुढ़ापा पेंशन बनवा ली अब उनकी मृत्यु होने पर पारिवारिक पेंशन लेने में परेशानी आई तो बुढ़ापा पेंशन की रिकवरी कर विभाग में पैसा जमा करवा रहे हैं। उसके बाद समाज कल्याण विभाग से उनको एनओसी दी जाती है, उसके बाद लोग अपनी पारिवारिक पेंशन बनवा रहे हैं। ऐसे केस रोजाना दो से तीन आ रहे हैं। अमित शमा, समाज कल्याण अधिकारी, नारनौल।
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