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मैपिंग ऑफ एकड़ एप से होगा क्रॉप वेरिफिकेशन का काम

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जिले में खेती से संबंधित ब्योरा एकत्रित करने के लिए फसल वेरिफिकेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह कार्य लोकेशन आधारित एप के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विभागों के कर्मचारी खेतों में बोई गई फसलों के आंकड़े जुटाएंगे। यह कार्य 25 फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि फसल वेरिफिकेशन में रबी सीजन के दौरान बोई गई फसलों के आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। इस कार्य के लिए मैपिंग ऑफ एकड़ एप बनाया गया है। इसी एप के माध्यम से संबंधित कर्मचारी अपने मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए आंकड़े भरेंगे। यह एप लोकेशन आधारित बनाया गया है। एप के डाउनलोड करने के बाद खेत में खड़े होते ही फोन में लोकेशन आ जाएगी। इसके बाद संबंधित खेत की डिटेल भरी जाएगी। जिसमें किला व खेवट नंबर के अनुसार फसल का नाम भरना होता है।
159 कर्मचारी करेंगे क्रॉफ वेरिफिकेशन का कार्य
उन्होंने बताया कि पूरे जिले में 159 कर्मचारियों को फसल वेरिफिकेशन करने का कार्य दिया गया है। इस कार्य में कृषि विभाग के 124 कर्मचारियों के अलावा मार्केट कमेटी के 12, बागवानी के 15 और सिंचाई विभाग के 8 कर्मचारियों का सहयोग लिया जा रहा है। इस एप के माध्यम से सरकार के पास जिले में खड़ी फसल तथा बिजाई से वंचित जमीन का ब्योरा एकत्रित किया जाएगा।
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2.70 लाख एकड़ भूमि पर बोई गई है सरसों
उन्होंने बताया कि रबी सीजन में 2,70,000 एकड़ में सरसों, 75,000 में गेहूं, 12,000 में चना, 1,500 में बागवानी एवं सब्जी आदि बोई गई है। इस प्रकार जिले में कुल 3,65,200 एकड़ में फसल बोई गई है। डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि मोबाइल एप के जरिये फसल वेरिफिकेशन होने से आंकड़े सटीक दर्ज होंगे। विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में फसल की सही जानकारी मुख्य कड़ी होती है। इससे पहले मेन्युअली कार्य से कई बार भावांतर भरपाई योजना या अन्य योजनाओं के डाटा का मिलान सही ढंग से नहीं हो पाता था। अब किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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