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बाजरे की फसल पककर तैयार, बदलते मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता

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बारिश के बाद भीगी कपास की फसल। संवाद - फोटो : Narnol
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महेंद्रगढ़। पिछले एक सप्ताह में क्षेत्र में हो रही हल्की बारिश एवं मौसम में आ रहे बदलाव के कारण किसानों को फसल खराब होने का भय सताने लगा है। बाजरे की अगेती फसल भी अधिकांश पककर तैयार है और कपास भी पहली चुनाई पर आ चुकी है। ऐसे में लगातार मौसम परिवर्तनशील रहने से फसलों में नुकसान की आशंका से अन्नदाता की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
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वहीं मौसम विभाग के द्वारा भी मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है जो किसानों की चिंता को और बढ़ा रहा है। बाजरा की फसल में अधिक नुकसान की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा कपास के फूल व टिंडे गलने शुरू हो चुके हैं। वहीं ग्वार फसल में भी झुलसा रोग आने की संभावना बनी हुई है। मूंग भी पककर तैयार है ऐसे में और बारिश होती है तो मूंग की फलियां फटनी शुरू हो जाएंगी जिससे उत्पादन प्रभावित होगा।
जिला में ये है फसलों की स्थि:ि
जिला में इस बार 2 लाख 8 हजार 28 एकड़ में बाजरा, 20996 एकड़ में कपास, 2602 एकड़ में ग्वार व 22117 एकड़ में मूंग बिजाई की है। बाजरा व कपास दोनों परंपरागत फसलों के अलावा इस बार जिला में मूंगफली, तिल, अरंड व अरहर का भी रकबा बढ़ा है। इस समय 64 एकड़ में अरहर, 24 एकड़ में अरंड, 431 एकड़ में तिल व 677 एकड़ में मूंगफली की गई है।
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9 तक रहेगा मौसम परिवर्तनशील
केवीके के कृषि मौसम विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. दिवेश चौधरी ने बताया कि 9 सितंबर तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। इस दौरान हल्की बारिश एवं हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। बीच-बीच में धूप भी खिलेगी।
मौसम के अनुसार करें खेतों में काम: डॉ. रमेश
केवीके के कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि किसान बाजरे की कटाई मौसम को ध्यान में रखते हुए शुरू करें। अधिक बारिश के कारण फसलों में रोग प्रबंधन आवश्यक है। अधिक बारिश के कारण पकी हुई बाजरे की फसल में नुकसान की संभावना है। वहीं ग्वार में झुलसा रोग तथा मूंग में भी अधिक बारिश के कारण फलियां टूटनी शुरू हो जाएंगी। कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए किसान कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।
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